किसी भी समाज की तरक्की कैसे मुमकिन है?
भूमिका
प्रस्तुत पंक्तियां यह स्पष्ट करेंगी कि समाज में प्रगति के क्या कारक हैं और प्रगति में बाधक क्या?
समाज की प्रगति
समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब हर क्षेत्र की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के पास हो जो समझदार, जागरूक और निःस्वार्थ हों।
आज हालात ये हैं कि राजनीति से जुड़े लोग हर क्षेत्र में दखल देने लगे हैं — चाहे वह समाजसेवा हो, धर्म हो, शिक्षा हो या इलाज का क्षेत्र। अब सब कुछ मिला-जुला सा हो गया है और किसी भी क्षेत्र में साफ़ सोच और असली मकसद नज़र नहीं आता।
इसका असर यह हुआ है कि शिक्षित और ईमानदार नागरिक खुलकर अपना काम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हर जगह राजनीति का दबदबा बढ़ गया है।
अब आवश्यकता है ऐसी व्यवस्था की, जहाँ हर क्षेत्र अपनी पहचान और मकसद के अनुसार काम करे पर राजनीति से दूर रहकर।
खासकर समाज और धर्म से जुड़े क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। इनका नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो जागरूक हों, बदलाव लाने का जज़्बा रखते हों और राजनीति से दूर हों। तभी ये क्षेत्र फिर से अपनी असली राह पर लौट सकते हैं।
आइडिया
श्री (इंजीनियर) सत्यपाल सिंह जी
पाठ्य उन्नयन
चैट जीपीटी
प्रस्तुति


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