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सितंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गृहणी से लेकर सरपंच, लेखिका और समाजसेवी बनीं कंचन जी

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भूमिका   गाँव की साधारण गृहणी से लेकर सरपंच, लेखिका और समाजसेवी तक की प्रेरणादायी यात्रा तय करने वाली कंचन राठौड़ आज महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने रूढ़िवादी परंपराओं को चुनौती देकर महिलाओं को घूंघट और संकोच की ओट से बाहर निकालने का साहसिक प्रयास किया। उनकी संस्था We Can न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि मानसिक संबल और सामाजिक पहचान भी दिला रही है। कंचन जी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, डिजिटल ज्ञान और सरकारी योजनाओं के माध्यम से हजारों महिलाओं और बालिकाओं की जिंदगी बदल डाली है। उनकी कविताओं और लेखन ने भी समाज में स्त्री के सम्मान और अस्तित्व के प्रति नई चेतना जगाई है। आइए, उनसे हुई प्रेरणादायी बातचीत पर नज़र डालते हैं— प्रेरणादायी साक्षात्कार : कंचन राठौड़ प्रश्न १. कंचन जी, सबसे पहले हम यह जानना चाहेंगे कि एक साधारण गृहणी से सरपंच और फिर We Can संस्था की संस्थापिका बनने तक की यह यात्रा आपने कैसे तय की? उत्तर : "यह यात्रा संघर्षों से भरी रही। मैंने कई महिलाओं को घुट-घुटकर जीते हुए देखा। शराबी पति, आर्थिक तंगी, ...

संस्कृति को सहेजने वाली प्रतिभा हैं शारदा जी

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भूमिका डॉ. शारदा देवड़ा राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नए आयाम देने वाली एक बहुआयामी प्रतिभा हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन की प्रख्यात कलाकार, लोक संगीत विशेषकर मांड गायन की संरक्षक, संवेदनशील कवयित्री, सृजनशील चित्रकार और समर्पित शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। दो दशकों से अधिक समय से वे संगीत, साहित्य और कला को अपने जीवन की साधना मानकर समाज तक पहुँचा रही हैं। उनके खाते में 200 से अधिक पुरस्कार, अनेक शोध पत्र, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुतियां और चित्र प्रदर्शनियों की समृद्ध श्रृंखला शामिल है। डॉ. शारदा देवड़ा का व्यक्तित्व यह सिद्ध करता है कि जब परंपरा और नवाचार का संगम होता है, तब एक कलाकार संस्कृति का जीवंत दूत बन जाता है। बातचीत प्रश्न १. डॉ. शारदा जी, सबसे पहले हम यह जानना चाहेंगे कि संगीत, कला और साहित्य की इस त्रिवेणी यात्रा की शुरुआत आपके जीवन में कब और कैसे हुई? उत्तर : "यह मेरे लिए विरासत का आशीर्वाद है। मेरे पिताजी डी.सी. देवड़ा स्वयं गुरु रहे हैं और हम सभी भाई–बहनों को संगीत, साहित्य और कला घर के वातावरण से...

पुस्तकालय प्रबंधन में दक्ष श्री बी.एस. पोसवाल जी से संवाद

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भूमिका   यहाँ एक मार्गदर्शक शैली का साक्षात्कार प्रस्तुत है, जिसमें एक प्रतिष्ठित पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) से पुस्तकालय प्रबंधन से जुड़े दस महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों को शामिल किया गया है। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह अन्य पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए दिशानिर्देश (directive) का रूप ले सके। प्रतिष्ठित पुस्तकालयाध्यक्ष  श्री बी.एस. पोसवाल जी से संवाद साक्षात्कारकर्ता (प्रश्नकर्ता) : आदरणीय पोसवाल सर, सबसे पहले साक्षात्कार मेंआपका स्वागत है। आपसे पुस्तकालय प्रबंधन की बारीकियों पर बातचीत करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। प्रश्न १. पुस्तकालय प्रबंधन का मूल उद्देश्य क्या होना चाहिए? उत्तर : "पुस्तकालय प्रबंधन का पहला उद्देश्य केवल किताबों का संग्रह रखना नहीं, बल्कि पाठकों को ज्ञान तक सहज पहुँच दिलाना है। इसमें संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग, नई तकनीक का समावेश और पाठकों की आवश्यकता के अनुसार सेवाएँ देना शामिल है।" प्रश्न २. पुस्तकालय में पुस्तकों का चयन किस आधार पर किया जाना चाहिए? उत्तर : "चयन प्रक्रिया में तीन बातें अहम हैं— 1. पाठकों की रुचि और आवश्यकता, ...

वरिष्ठ अध्यापिका एवं साहित्यकार हैं रेखा शर्मा जी

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  ✨ साक्षात्कार : वरिष्ठ अध्यापिका एवं साहित्यकार रेखा शर्मा   भूमिका हिन्दी साहित्य जगत में रेखा शर्मा जी एक ऐसा नाम है, जिन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है, बल्कि साहित्यिक सृजन की विविध विधाओं—कविता, कहानी, लघुकथा, पाती लेखन और आलेख—में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। राजस्थान के बीकानेर शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापिका के रूप में कार्यरत रहते हुए भी उन्होंने साहित्य को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखा। अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी, साझा संकलनों में योगदान तथा कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित होना उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण है। प्रस्तुत है, उनके जीवन, लेखन और दृष्टिकोण पर आधारित एक सारगर्भित बातचीत। बातचीत प्रश्न १. रेखा जी, आपके जीवन की शुरुआत शिक्षा और साहित्य दोनों से जुड़ी रही। आपको सबसे पहले साहित्य की ओर किसने प्रेरित किया? उत्तर : "बचपन से ही हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति गहरी आत्मीयता रही। विद्यालय के दिनों में कविताएँ लिखना शुरू किया और शिक्षकों का प्रोत्साहन मिला। यही प्रेरणा धीरे-धीरे मेरे ले...