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विवेक, पुरुषार्थ और भीड़ का मनोविज्ञान: राष्ट्रनिर्माण के दो रास्ते

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भूमिका समाज और राष्ट्र का भविष्य केवल व्यवस्थाओं, आंदोलनों या नारों से तय नहीं होता, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर सक्रिय विवेक और उसके द्वारा किए गए पुरुषार्थ से आकार लेता है। जब मनुष्य अपने श्रम, कौशल और संवेदनशील सोच के साथ जीवन को गढ़ता है, तब सृजन जन्म लेता है; और जब वही मनुष्य विवेक को त्यागकर आक्रोश व भीड़ की मानसिकता के हवाले हो जाता है, तब विध्वंस अनिवार्य हो जाता है। उलझन–सुलझन मासिक प्रशासित ब्लॉग “जीवन की अनुभूतियां” के इस आलेख में यही प्रश्न केंद्र में है कि हम असहमति, पीड़ा और क्षोभ को निर्माण की ऊर्जा में कैसे बदलें, और क्यों विवेकपूर्ण पुरुषार्थ ही वह मार्ग है जो व्यक्ति को भी संवारता है और समाज को भी। यह भूमिका पाठक को आत्ममंथन के लिए आमंत्रित करती है—कि जीवन में हम भीड़ बनना चाहते हैं या सृजनकर्ता। विवेक, पुरुषार्थ और भीड़ का मनोविज्ञान  एक साधारण-सा यूट्यूब वीडियो—बांग्लादेश के एक कारीगर का—हमें बहुत गहरे प्रश्नों के सामने ला खड़ा करता है। वह कारीगर किसी मंच पर भाषण नहीं देता, न किसी राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध नारे लगाता है। वह बस अपने हाथों, अनुभव और धैर्य से नारिय...

✦रटंत शिक्षा को समाप्त कर क्या तकनीक कक्षाओं में रोचकता ला सकती है?

✦ भूमिका   क्यों यह लेख आज ज़रूरी है? आज की शिक्षा व्यवस्था केवल पाठ्यक्रम या परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। माता-पिता, शिक्षक और विद्यार्थी—तीनों के मन में यह प्रश्न गूंज रहा है कि क्या बच्चे सच में सीख रहे हैं या केवल रट रहे हैं? डिजिटल युग में जब मोबाइल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, तब यह समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है कि तकनीक शिक्षा को कैसे बदल और कैसे बिगाड़ भी सकती है।इसी संदर्भ में यह लेख पाठकों को AI के वास्तविक स्वरूप, उसकी संभावनाओं और सीमाओं से सहज भाषा में परिचित कराने का प्रयास है। ✦रटंत शिक्षा को समाप्त कर क्या तकनीक कक्षाओं में रोचकता ला सकती है? (प्रसिद्ध टेक इंडस्ट्री एनालिस्ट Kashyap Kompella के विचारों पर आधारित) शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से एक समस्या बनी हुई है—रटंत शिक्षा। बच्चे उत्तर याद तो कर लेते हैं, पर समझ विकसित नहीं हो पाती। प्रश्न पूछना उन्हें जोखिम लगता है और गलती करना डरावना। अपने लेख “Trick Question: Can tech root out rote, bring joy into classrooms?” में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित AI एवं टेक्नोलॉजी विश्लेष...

प्रेम सिंह निठारी का आत्मकथ्य

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भूमिका उलझन सुलझन के नैतिक समन्वयक श्री प्रेम सिंह निठारी को जब उनके क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्र भैंसी में एक अत्यंत सार्थक और प्रेरक ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला में प्रतिभाग का अवसर मिला तो उन्होंने सर्वप्रथम अपने घरेलू कार्यदायित्व निपटाए और फिर प्रतिभाग की तैयारी की। प्रेम सिंह निठारी का आत्मकथ्य मैं, प्रेम सिंह तोमर , ग्राम निठारी का निवासी और समाज के सामूहिक विकास में विश्वास रखने वाला एक साधारण कार्यकर्ता, यह साझा करते हुए गर्व का अनुभव करता हूँ कि हमारे क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्र भैंसी में एक अत्यंत सार्थक और प्रेरक ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला  का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, भौतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा छात्र नामांकन में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद स्थापित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी श्री पंकज अग्रवाल एवं खंड विकास अधिकारी श्रीमती ज्योति बाला द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया—जो ज्ञान, ...