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स्मृति शेष

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भूमिका कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और संवेदनाएँ ही संवाद बन जाती हैं। किसी प्रिय आत्मा का देहावसान केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, वह परिवार, स्मृतियों और संबंधों के एक पूरे संसार में फैलती हुई निस्तब्ध पीड़ा का विस्तार होता है। श्रीमती विमला देवी जी के देवलोकगमन का समाचार भी इसी गहन संवेदनात्मक अनुभूति से मन को भर देता है। “अंतर्संबंध” ब्लॉग सदैव मनुष्यता, रिश्तों की ऊष्मा और संवेदनाओं के साझा स्पंदन का मंच रहा है। इस मंच पर हम केवल शब्द नहीं रखते, बल्कि उन भावों को स्थान देते हैं जो संबंधों की आत्मा से जुड़ते हैं। आज जब नेगी परिवार शोक की इस कठिन घड़ी से गुजर रहा है, तब प्रत्यक्ष उपस्थिति से अधिक आवश्यक है आत्मीय सहभागिता और करुण संवेदना। इन्हीं अंतरंग भावों के साथ, “उलझन सुलझन” टीम की ओर से यह शोक संदेश एक सामूहिक श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है—ऐसी श्रद्धांजलि, जिसमें स्मृतियों का आदर, संबंधों की पीड़ा और दिवंगत आत्मा के प्रति विनम्र नमन समाहित है। यह संदेश केवल शोक की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस ममतामयी व्यक्तित्व क...

साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च राष्ट्रीय संगोष्ठी

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साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च संगोष्ठी  सहभागी प्रो. (डॉ.) राकेश राणा की आँखों-देखी मैं जब एम.एम.एच. कॉलेज, गाज़ियाबाद के परिसर में पहुँचा, तो वहाँ का शैक्षणिक वातावरण अत्यंत ऊर्जावान और उत्साहपूर्ण दिखाई दे रहा था। भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च वास्तव में अपने विषय की गंभीरता और व्यापकता को प्रतिबिंबित कर रही थी। देश के विभिन्न भागों से आए शोधार्थियों और प्राध्यापकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया था। उद्घाटन सत्र का प्रारंभ मुख्य आयोजक डॉ. मनोज कुमार द्वारा केंद्रीय विषय के परिचय से हुआ। उन्होंने जिस स्पष्टता और गंभीरता से विषय की आवश्यकता और प्रासंगिकता को रखा, उसने पूरे वातावरण को चिंतनशील बना दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत किया। मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल साइंस लैबोरेटरी, अहमदाबाद, गुजरात से पधारे प्रो. एच. ओ. वत्स का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समकालीन महत्व पर...

शिक्षा के लिए समर्पित एक प्रेरक व्यक्तित्व

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शिक्षा के लिए समर्पित एक प्रेरक व्यक्तित्व उपप्राचार्य सुनीता मीणा जी शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली वह ज्योति है, जो संघर्षों के अंधकार को भी प्रकाश में बदल देती है। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, मानटाउन (सवाई माधोपुर) की उपप्राचार्य सुनीता मीणा जी का जीवन इसी ज्योति, समर्पण और अदम्य संघर्ष का प्रेरणादायी उदाहरण है। संघर्षों से सशक्त हुई शिक्षा यात्रा ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं सुनीता मीणा ने जीवन की अनेक चुनौतियों के बीच अपनी शिक्षा को निरंतर जारी रखा। सीमित संसाधन, सामाजिक अपेक्षाएँ और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ — इन सबके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी धूमिल नहीं होने दिया। उन्होंने केवल शिक्षा प्राप्त ही नहीं की, बल्कि 11 विषयों में एम.ए. कर एक अद्वितीय शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की, जो उनके ज्ञान के प्रति गहरे समर्पण को दर्शाती है। उनकी संघर्षगाथा का एक महत्वपूर्ण अध्याय वर्ष 2011 से जुड़ा है, जब उनकी प्रथम नियुक्ति ऐसे गांव में हुई जहाँ परिवहन की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उस समय उन्हें बस तक पहुँचने के लिए प्रतिदिन छह किलोमी...

प्रमिला जी की रचनाएं

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                        तेरी याद                                          पिंट्रेस्ट से साभार भूमिका प्रमिला त्रिवेदी की यह कविता विरह, स्मृति और मौन प्रेम की अत्यंत मार्मिक अभिव्यक्ति है, जिसमें बिछुड़ चुके जीवनसाथी के प्रति लेखिका का आत्मिक संवाद गहराई से उभरकर सामने आता है। यहाँ अनुपस्थिति केवल शारीरिक दूरी नहीं, बल्कि एक ऐसी भावावस्था है जहाँ स्मृतियाँ ही अस्तित्व का सहारा बन जाती हैं—“तुम नहीं हो” की स्वीकृति के साथ “हर पल साथ हो” का अनुभूत सत्य एक अदृश्य संबंध को जीवित रखता है। लेखिका अपने भीतर के टूटन, अकेलेपन और अधूरेपन को शब्दों में ढालते हुए यह दर्शाती हैं कि प्रेम मृत्यु या दूरी से समाप्त नहीं होता, बल्कि स्मृतियों, नादानियों और मौन में और अधिक गहरा हो जाता है। इस कविता में पीड़ा और प्रेम का अद्भुत संतुलन है, जहाँ जीवित होते हुए भी भीतर से शून्य हो जाने की अनुभूति और अंततः खामोशी को ही प्रेम की अंतिम भाषा मान लेने...

तुझको सजाता रहा (कविता)

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  तुझको सजाता रहा भूमिका   “तुझको सजाता रहा” एक ऐसी भाव-प्रधान रचना है जिसमें कवि ने प्रेम को बाह्य यथार्थ से अधिक अंतर्मन की सृजनात्मक प्रक्रिया से जोड़ा है। यह कविता किसी प्रत्यक्ष मिलन की कथा नहीं, बल्कि कल्पना, स्मृति और भाव-साधना के माध्यम से रची गई एक आत्मिक संवाद-यात्रा प्रतीत होती है। कवि अपनी प्रियतमा को व्यक्ति से अधिक एक काव्य-प्रेरणा के रूप में ग्रहण करता है और इसी कारण उसकी उपस्थिति शब्दों, छन्दों और बिम्बों में मूर्त होती चलती है। रचना का प्रमुख स्वर श्रृंगार के वियोग पक्ष से सम्बद्ध है, परन्तु इसमें करुणा का मृदु स्पर्श भी अंतर्निहित है। कवि बार-बार “अपने शब्दों से तुझको सजाता रहा” जैसी आवृत्ति के माध्यम से यह संकेत देता है कि सृजन ही उसके लिए सांत्वना का साधन है। इस दृष्टि से कविता केवल प्रेमाभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सर्जक-मन की आंतरिक प्रक्रिया का सूक्ष्म चित्रण भी है। भाषा सरल, प्रवाहमयी तथा भावानुकूल है। तत्सम और प्रचलित शब्दों का संतुलित प्रयोग रचना को गरिमा देता है, जबकि “पूनम की ज्यों चाँदनी”, “नयन के निलय” जैसे बिम्ब सौम्यता और कोमलता का वातावरण निर्मित ...

लेखन से अभिव्यक्ति

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उलझन सुलझन मासिक का एक सृजनशील सेतु लेखन मनुष्य की अंतर्निहित अभिव्यक्ति को आकार देता है। यह भीतर उमड़ते भावों, जीवन के अनुभवों, समझ की परतों और विचारों की धाराओं को शब्द प्रदान करता है। नियमित लेखन न केवल आत्मसंवाद को गहरा करता है, बल्कि दृष्टि को परिष्कृत और व्यक्तित्व को सुदृढ़ भी बनाता है। लेखन की इसी शक्ति को आमजन तक पहुँचाने के उद्देश्य से ‘उलझन सुलझन जागरूकता मासिक’ ने ‘लेखन से अभिव्यक्ति’ शीर्षक से एक सशक्त ब्लॉग मंच तैयार किया है—जहाँ विविध विषयों पर लिखे गए ब्लॉग पाठकों को न केवल सामग्री प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें स्वयं लेखन के लिए प्रेरित भी करते हैं। यह ब्लॉग विशेष रूप से इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि इसे पढ़कर कोई भी अपनी दिनचर्या, अनुभवों और भावनात्मक संसार को लेखन में बदलने की कला सहज ही सीख सकता है। पाठ्य सामग्री विस्तृत, सहज, संवेदनशील और अत्यंत उपयोगी है—जो लेखनी को समृद्ध करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन और अभ्यास दोनों प्रदान करती है। ब्लॉग के अंतर्गत प्रमुख वर्गीकरण एवं उनकी उपयोगिता उपरोक्त विविध ब्लॉगों को आधार बनाकर इन्हें निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है...

डॉ. अशोक कुमार चौधरी का विशेष आत्मकथ्य

मैं, डॉ. अशोक कुमार चौधरी, एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में उस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना, जब रैपिड रेल के शुभारम्भ के मंच से क्रांतिधरा मेरठ की गौरवगाथा का स्मरण किया गया। उस क्षण मेरे भीतर केवल विकास की खुशी ही नहीं, बल्कि इतिहास के प्रति गहरी श्रद्धा का भाव भी जागृत हुआ। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के उद्बोधन ने मुझे यह अनुभूति कराई कि मेरठ मात्र एक नगर नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता चेतना की वह पवित्र भूमि है, जिसने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर शंखनाद को जन्म दिया। जब उन्होंने धन सिंह गुर्जर, राव कदम सिंह, शाहमल और मातादीन बाल्मीकि जैसे महान क्रांतिकारियों का उल्लेख किया, तब मुझे लगा मानो इतिहास स्वयं हमारे सामने जीवंत हो उठा हो। इन वीरों के साहस, नेतृत्व और त्याग ने न केवल मेरठ बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। एक कार्यकर्ता होने के नाते मेरे लिए यह गर्व का विषय है कि मैं ऐसी भूमि से जुड़े विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने वाली विचारधारा का हिस्सा हूँ, जहाँ विकास और विरासत साथ-साथ चलने की परंपरा है। मेरे आत्ममन में यह भावना और ...

कवयित्री पूनम जैन अग्रवाल ‘चाँदनी’ की कार्य योजना

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कवयित्री पूनम जैन अग्रवाल ‘चाँदनी’ ने अपनी काव्य कृति नारी ना हारी की कार्य योजना को कोई आकस्मिक साहित्यिक प्रयोग के रूप में नहीं, बल्कि एक सुनियोजित, संवेदनात्मक और दीर्घ साधना के रूप में मूर्त रूप दिया। यह कृति उनके भीतर वर्षों से संचित नारी जीवन के अनुभवों, समाज के अवलोकन और आत्ममंथन की प्रक्रिया का परिणाम है। सबसे पहले उन्होंने विषय की स्पष्ट परिकल्पना की। उनके मन में यह दृढ़ भाव था कि नारी को केवल करुणा या संघर्ष के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि अडिग चेतना, आत्मसम्मान और सृजनशील शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी दृष्टि से उन्होंने पुस्तक का मूल भाव निर्धारित किया— “नारी पराजित नहीं होती, वह परिस्थितियों से परिष्कृत होती है।” इसके पश्चात उन्होंने व्यापक जीवन-अवलोकन को अपनी योजना का आधार बनाया। पूनम जैन जी ने सामाजिक परिवेश, पारिवारिक संरचना, आधुनिक नारी की चुनौतियों तथा पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाती स्त्री के विविध रूपों का सूक्ष्म अध्ययन किया। वे केवल कल्पना पर निर्भर नहीं रहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की घटनाओं, संवादों और अनुभूतियों को अपनी लेखनी का आधार बनाया। रचनात्म...