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🎤“पॉज़िटिव पेरेंटिंग - आइये! मिलकर बदलें बच्चों का भविष्य”

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 🎤“पॉज़िटिव पेरेंटिंग  आइये! मिलकर बदलें बच्चों का भविष्य” 1️⃣ स्वागत एवं दीप प्रज्वलन प्रवेन्द्र दहिया (प्रधानाचार्य): “नमस्कार अभिभावकगण! आज हम सब यहां एक महत्वपूर्ण उद्देश्य के लिए इकट्ठे हुए हैं – अपने बच्चों के लिए बेहतर वातावरण और सकारात्मक पालन-पोषण सीखने के लिए। मैं मुख्य वक्ता श्री संजय आहूजा जी, पूजा आहूजा जी, रीटा दहिया जी और आदित्य दहिया जी का स्वागत करता हूं। आइए, हम दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करें।” (दीप प्रज्वलन के बाद सभी बैठते हैं) 2️⃣ मुख्य वक्ता संजय आहूजा अपने संबोधन में “माता-पिता से मेरा पहला सवाल – आप चाहते हैं कि आपके बच्चे कैसे बड़े हों?” (अभिभावक उत्तर देते हैं – “संस्कारवान”, “आत्मविश्वासी”, “अच्छा इंसान” आदि।) संजय: “बहुत सही कहा! लेकिन याद रखें – बच्चे वही बनते हैं जो वे अपने माता-पिता से देखते हैं। अगर हम गुस्सा करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा। अगर हम तारीफ़ करते हैं, तो बच्चा आत्मविश्वासी बनेगा। 👉 समाधान क्या है? बच्चों के गुणों को पहचानें अच्छे व्यवहार की सराहना करें छोटी गलतियों को नज़रअंदाज़ करें माहौल में प्यार और सहयोग रखें अब म...

🌺 लेखिका श्रीमती पुष्पा शर्मा 'कुसुम' से साहित्यिक संवाद

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भूमिका यहाँ पर श्रीमती पुष्पा शर्मा 'कुसुम' के लेखन कौशल का परीक्षण करते हुए कुछ प्रश्नोत्तर दिए गए हैं जो साहित्यिक साक्षात्कार शैली में तैयार किये गये हैं। ये उनकी रचनात्मकता, शैली, अभिरुचि और योगदान को समझने में मदद करेंगे। इनको सभी छंदों का ज्ञान है और 'कुसुम छंदशाला' में सभी प्रकार के छंद सिखाती हैं। अभी हाल ही में 'कृष्ण परात्पर बह्म' पुस्तक का भी विमोचन हुआ है। बातचीत 🌺 लेखिका श्रीमती पुष्पा शर्मा 'कुसुम' से साहित्यिक संवाद प्रश्न 1. आपकी साहित्य यात्रा की शुरुआत कब और कैसे हुई? उत्तर: " मेरी साहित्य यात्रा का प्रारंभ विद्यार्थी जीवन में ही हो गया था, किन्तु सक्रिय रूप से लेखन में आने का श्रेय सेवा-निवृत्ति के बाद मिले समय और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म को जाता है। यह मेरे स्वाध्याय और आत्माभिव्यक्ति का माध्यम बन गया।" प्रश्न 2. आपकी रचनाओं में इतने विविध छंदों का प्रयोग देखने को मिलता है, इसकी प्रेरणा कहाँ से मिली? उत्तर: " भारतीय छंद शास्त्र अत्यंत समृद्ध है। मेरी रुचि प्रारंभ से ही छंदबद्ध कविता में थी।फिर व्हाट्सएप साहित्यिक मं...

जनजागरूकता और समाजसेवा में जुटी एक प्रतिभा

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भूमिका हर इंसान के जीवन में ऐसा कोई क्षेत्र होता है, जहाँ वह केवल अपना कर्तव्य निभाकर ही नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। डाक विभाग का एक कर्मचारी होने के नाते मेरा मानना है कि सेवा केवल ऑफिस तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह जनता के जीवन में विश्वास, सुविधा और सुरक्षा पहुँचाने का माध्यम बनती है। यही भावना मुझे प्रेरित करती है कि मैं अपनी ड्यूटी के साथ-साथ हर पल देशहित में जनजागरूकता और समाजसेवा में जुटा रहूँ। यह भूमिका केवल मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो अपने काम को समर्पण और निष्ठा से निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है।                                                अरुण मोहन  शंखधर  भाव मैं डाक विभाग का एक समर्पित कर्मचारी हूँ और गर्व के साथ कह सकता हूँ कि मेरा हर कार्य देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित है। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं को आम जनता तक पहुँचाना मेरा मुख्य उद्देश्य है। अपने वरिष्ठ अधिकार...

प्रतिभा जोशी जी के लिए उनके साहित्यिक योगदान से परिचय

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लेखिका प्रतिभा जोशी का संग यहाँ प्रतिभा जोशी जी के लिए उनके साहित्यिक योगदान, लेखन विधा, अनुभव और दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए एक सशक्त साक्षात्कार प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया है, जो उनके कौशल और सोच को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है— ✨ साक्षात्कार ✨ संवाददाता: प्रतिभा जी, सबसे पहले आपका हार्दिक स्वागत है। कृपया हमें अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत के बारे में बताइए। प्रतिभा जोशी : धन्यवाद। मेरा लेखन एक आत्मिक आवश्यकता से उपजा। गृहिणी जीवन के बीच जब भावनाओं का संसार भीतर उमड़ता था, तो शब्द ही साथी बने। मेरी पहली कहानी संग्रह 'मनके' 2019 में प्रकाशित हुई और वहीं से लेखन को गंभीरता से लेना शुरू किया। प्रश्न: आपकी अब तक की तीनों कहानी संग्रह (मनके, झरोखे, दुनिया) में से आपके दिल के सबसे करीब कौन सा संग्रह है और क्यों? उत्तर: मनके मेरे लिए विशेष है, क्योंकि यह मेरी लेखकीय पहचान की पहली कड़ी है। लेकिन दुनिया में मेरी दृष्टि और अभिव्यक्ति अधिक परिपक्व हुई है। उसमें समसामयिक मुद्दों और स्त्री-मन की गहराई को समझने का प्रयास है। प्रश्न: आपकी कहानियों में संवेदना का पुट गहर...

डॉ. अंजू अग्रवाल 'लखनवी' है एक बहुआयामी व्यक्तित्व

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डॉ. अंजू अग्रवाल 'लखनवी' है  एक बहुआयामी व्यक्तित्व डॉ. अंजू अग्रवाल 'लखनवी' के बहुआयामी साहित्यिक, शैक्षिक, शोधात्मक एवं मंचीय योगदान को ध्यान में रखते हुए कुछ विशिष्ट प्रश्न और उनके उत्तर तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न किसी साक्षात्कार, परिचर्चा या प्रस्तुति के लिए उपयोगी हो सकते हैं।  बातचीत प्रश्न 1. आपने अनेक विधाओं में लेखन किया है — कविता, ग़ज़ल, लघुकथा, कहानी, हायकू आदि। आपकी लेखन यात्रा की शुरुआत किस विधा से हुई और कौन सी विधा आपको सबसे अधिक आत्मिक संतोष देती है? उत्तर: " मेरी लेखन यात्रा की शुरुआत कविता से हुई थी। भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकारों को शब्द देने की क्षमता मुझे कविता में सबसे पहले दिखी। हालांकि आज मैं लघुकथा को भी बेहद प्रभावशाली माध्यम मानती हूं, क्योंकि सीमित शब्दों में गहन संदेश देना चुनौतीपूर्ण होते हुए भी आत्मिक रूप से बहुत संतोषजनक होता है।" प्रश्न 2. 'सुनो लड़कियों' जैसा काव्य संग्रह राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह की अवधारणा क्या रही और किस वर्ग को मुख्य रूप से सम्बोधित करती है? उत...

अनीता चेची की साहित्यिक यात्रा और सांस्कृतिक साधना

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कविता की पीयूषधारा अनीता चेची की साहित्यिक यात्रा और सांस्कृतिक साधना भूमिका सृजनशीलता जब साधना बन जाए, तो उसका स्वर हर भाषा में गूंजता है और उसका प्रभाव हर संवेदनशील हृदय में उतरता है। हरियाणा की मिट्टी से उभरीं हिंदी साहित्य की समर्पित साधिका, अनीता चेची न केवल एक विदुषी शिक्षिका हैं, बल्कि वे एक प्रखर कवयित्री, कुशल कथाकार, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संवेदनशील व्यक्तित्व और संस्कृति की सच्ची संरक्षिका भी हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा कविताओं की सरिता, कहानियों की पीयूषधारा और मंचीय अभिव्यक्ति की गूंज से समृद्ध है। उनका काव्य केवल सौंदर्य की अभिव्यक्ति नहीं, अपितु संवेदना, चेतना और स्त्री-अस्मिता की आवाज़ भी है। वह शिक्षा के क्षेत्र में एक निष्ठावान अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं, साथ ही हिंदी की गरिमा को देश-विदेश के मंचों पर बखूबी प्रस्तुत कर रही हैं। यह साक्षात्कार उनके जीवन, साहित्य, संघर्ष, प्रेरणा और दृष्टिकोण की झलक देने का एक प्रयास है, ताकि उनके अनुभव नई पीढ़ी के लिए दिशा और ऊर्जा बनें। साक्षात्कार प्रश्न 1: आपके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कैसे हुई? इसके प्रेरक कौन ...

एन.सी.सी. का 77वां स्थापना दिवस

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भूमिका समाज में अपने श्रम से कुछ विभूतियाँ अपने दायित्व बोध का श्रेष्ठतम रूप में निर्वहन करके स्वयं को सबसे अलग सिद्ध कर देती हैं. यहाँ पर एक ऐसी ही विभूति का विवरण दिया जा रहा है जिनको सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कर गौरव की अनुभूति कराई गई.  एन.सी.सी. का 77वां स्थापना दिवस  रमनपाल सिंह राष्ट्र अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित सम्माननीय साथियो, दिनांक 15 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.) के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर एन.सी.सी. निदेशालय, दिल्ली कैंट स्थित भव्य प्रेक्षागार में एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय गौरव, अनुशासन एवं समाज सेवा को समर्पित एन.सी.सी. के उत्कृष्ट योगदान को रेखांकित करता है। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित श्री रमनपाल सिंह , जी.एम. (विजिलेंस), डीएसपी (सेवानिवृत्त), को राष्ट्रीय एन.सी.सी. अचीवर्स अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान एन.सी.सी. के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह, पी.वी.एस.एम. द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम की मुख्य विशेषत...

"सौंदर्य की आत्मा, आत्मबल की पहचान हैं हर्षा कल्याणी शैलेन्द्र बंसोडे

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भूमिका प्रस्तुत है हर्षा कल्याणी शैलेन्द्र बंसोडे जी का व्यक्तित्व-चित्र, जो उनके समग्र स्वरूप — उपलब्धियाँ, दृष्टिकोण, प्रेरणा और सामाजिक भूमिका — को प्रभावी और साहित्यिक शैली में उभारता है। ✨ व्यक्तित्व-चित्र  हर्षा कल्याणी शैलेन्द्र बंसोडे "सौंदर्य की आत्मा, आत्मबल की पहचान" महाराष्ट्र के कोपरगांव की धरती पर जन्मी हर्षा कल्याणी शैलेन्द्र बंसोडे नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल हैं — एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसमें सौंदर्य, संस्कृति, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय है। वे उन विरली आत्माओं में से हैं, जिनकी उपस्थिति न केवल मंच को रोशन करती है, बल्कि समाज की सोच को भी नई दिशा देती है। 🌺 शुरुआत की सरलता, लक्ष्य की ऊँचाई साधारण परिवेश से निकलकर असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचना आसान नहीं होता। परंतु हर्षा ने अपने सपनों की स्पष्टता और कर्म की निष्ठा से यह सिद्ध किया कि यदि संकल्प सच्चे हों तो सीमाएँ पिघल जाती हैं। बचपन से ही उनकी आँखों में एक चमक थी — आत्म-विश्वास की, कुछ अलग करने की, और उस आत्मा की जो केवल अपने लिए नहीं, समाज के लिए भी जीती है। 👑 सौंदर्य प्रतियोगिताओं में वैचा...

एक बहुआयामी प्रेरणा हैं डॉ. क्रान्ति महाजन जी

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श्री (डॉ.) क्रान्ति महाजन एड.   एक बहुआयामी प्रेरणा भूमिका   "संघर्ष से सफलता तक, और फिर सेवा से सरोकार तक की एक अनुपम यात्रा" — यही परिभाषा है डॉ. क्रान्ति महाजन जैसे अद्भुत व्यक्तित्व की, जिन्होंने विविध आयामों में न केवल विशिष्ट योग्यता अर्जित की, अपितु समाज के लिए उत्कृष्ट योगदान देकर एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, साहित्यिक सृजन, पत्रकारिता, प्राकृतिक चिकित्सा, विधि-ज्ञान या सामाजिक नेतृत्व—हर क्षेत्र में डॉ. महाजन ने अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से एक आदर्श स्थापित किया है। उनके कार्यों को विभिन्न महामहिम राज्यपालों, केंद्रीय मंत्रियों, सैन्य अधिकारीगणों और विशिष्ट संस्थानों की सराहना प्राप्त हुई है। आज हम आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं उनका एक विशेष साक्षात्कार, जो उनके जीवन-संघर्ष, दृष्टिकोण और प्रेरणाओं को उजागर करता है। विशेष साक्षात्कार प्रश्न 1. आपके जीवन की शैक्षणिक यात्रा अत्यंत विविध और विस्तृत रही है। आपने इतने क्षेत्रों में डिग्रियाँ कैसे प्राप्त कीं और क्या प्रेरणा रही? उत्तर: " बचपन से ही ज्ञान के प्रति गहरी ललक थी। मैं हमेशा यह म...

सपनों की ऊँचाई तक पहुँचीं हर्षा

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🌸 विशेष साक्षात्कार "सपनों की ऊँचाई तक पहुँचीं हर्षा" साक्षात्कारकर्ता: ज्योति भड़ाना (स्थानीय संपादिका, उलझन                             सुलझन , लेडीज विंग , फरीदाबाद)  स्थान: कोपरगांव (महाराष्ट्र)  विषय: " मिस हेरिटेज इंटरनेशनल 2024 की द्वितीय रनर                अप हर्षा बंसोडे से विशेष बातचीत" 🟣 प्रारंभिक जीवन और प्रेरणा प्र. 1. आपके शुरुआती जीवन की कहानी क्या है? बचपन से आप में मॉडलिंग या फैशन की रुचि कैसे जागी? उत्तर : "मेरा जन्म महाराष्ट्र के कोपरगांव में हुआ। एक सामान्य लेकिन मूल्यनिष्ठ परिवार में पली-बढ़ी हूँ। बचपन में मैं दर्पण के सामने खड़ी होकर कभी टीचर, कभी डांसर और कभी रैंप वॉक करते मॉडल की तरह खुद को देखने का अभिनय करती थी। यहीं से मुझे अपने अंदर की चमक का एहसास हुआ।" प्र. 2: आपके परिवार ने आपके करियर के चुनाव में किस तरह का समर्थन किया? उत्तर : "परिवार का साथ मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है। शुरुआत में कुछ आशंकाएँ थीं, लेकिन जब उन्होंने मेरी लगन और ईमानदार...