एक बहुआयामी प्रेरणा हैं डॉ. क्रान्ति महाजन जी

श्री (डॉ.) क्रान्ति महाजन एड.  

एक बहुआयामी प्रेरणा

भूमिका 

"संघर्ष से सफलता तक, और फिर सेवा से सरोकार तक की एक अनुपम यात्रा" — यही परिभाषा है डॉ. क्रान्ति महाजन जैसे अद्भुत व्यक्तित्व की, जिन्होंने विविध आयामों में न केवल विशिष्ट योग्यता अर्जित की, अपितु समाज के लिए उत्कृष्ट योगदान देकर एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की।

चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, साहित्यिक सृजन, पत्रकारिता, प्राकृतिक चिकित्सा, विधि-ज्ञान या सामाजिक नेतृत्व—हर क्षेत्र में डॉ. महाजन ने अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से एक आदर्श स्थापित किया है। उनके कार्यों को विभिन्न महामहिम राज्यपालों, केंद्रीय मंत्रियों, सैन्य अधिकारीगणों और विशिष्ट संस्थानों की सराहना प्राप्त हुई है।

आज हम आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं उनका एक विशेष साक्षात्कार, जो उनके जीवन-संघर्ष, दृष्टिकोण और प्रेरणाओं को उजागर करता है।

विशेष साक्षात्कार

प्रश्न 1. आपके जीवन की शैक्षणिक यात्रा अत्यंत विविध और विस्तृत रही है। आपने इतने क्षेत्रों में डिग्रियाँ कैसे प्राप्त कीं और क्या प्रेरणा रही?

उत्तर: "बचपन से ही ज्ञान के प्रति गहरी ललक थी। मैं हमेशा यह मानता था कि हर विषय कुछ नया सिखाता है। मैंने चिकित्सा, पत्रकारिता, लाइब्रेरी साइंस, कानून और योग जैसे विविध क्षेत्रों में अध्ययन किया, क्योंकि हर विषय मुझे समाज सेवा में एक नया दृष्टिकोण देता है।"

प्रश्न 2. आपकी जीवनी को एक राष्ट्रीय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह अनुभव आपके लिए कैसा रहा?

उत्तर: "यह मेरे जीवन के संघर्ष और संकल्प की स्वीकृति थी। जब क्रिएटिव मीडिया, लखनऊ ने इसे प्रकाशित किया, तब मुझे लगा कि मेरी कहानी शायद दूसरों को भी प्रेरणा दे सकती है।"

प्रश्न 3. पद्मश्री पुरस्कार हेतु नामांकन प्राप्त करना एक बड़ी उपलब्धि है। आपको क्या लगता है कि इसके पीछे मुख्य कारण क्या रहे?

उत्तर: "यह मेरी टीम के सामूहिक प्रयास, मेरी निष्ठा और समाज के लिए मेरे कार्यों की मान्यता है। मैं इसे एक जिम्मेदारी के रूप में देखता हूँ, न कि उपलब्धि के रूप में।"

प्रश्न 4. आपकी पुस्तकों को UGC द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में संदर्भ-ग्रंथ के रूप में चुना गया। यह किस प्रकार की पुस्तकों पर आधारित हैं?

उत्तर: "मेरी पुस्तकें शोध आधारित हैं और सामाजिक, ऐतिहासिक तथा प्रेरक चरित्रों पर केंद्रित हैं। यह सामग्री पीएच.डी. शोधार्थियों को एक नया दृष्टिकोण देती है।"

प्रश्न 5. आपकी पुस्तक 'रयतेचा राजा' शिवाजी महाराज पर आधारित है। आपको इस विषय की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: "शिवाजी महाराज मेरे आदर्श हैं। उनका लोक-प्रेम, नेतृत्व और कूटनीति आज भी प्रासंगिक है। यह पुस्तक उनकी प्रजावत्सलता और युग-निर्माण पर केंद्रित है।"

प्रश्न 6. नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर आपकी शोध पुस्तक 'सुभाष सीक्रेट' काफी चर्चित रही। आपने इसके लिए किन-किन लोगों से संवाद किया?

उत्तर: "मैंने देशभर में यात्रा की और नेताजी के परिजनों, सहयोगियों तथा आज़ाद हिंद सेना के कुछ जीवित साक्षियों से संवाद किया। यह बीस वर्षों की कठिन साधना का परिणाम है।"

प्रश्न 7. आपने कोरोना काल में दस हज़ार किलोमीटर की प्राकृतिक चिकित्सा यात्रा की। इस पहल के पीछे आपकी सोच क्या थी?

उत्तर: "जब पूरा देश भय में था, तब मुझे लगा कि आत्मबल और प्रकृति की शक्ति से ही हम टिक सकते हैं। मैं चाहता था कि लोग दवा के साथ जीवनशैली और प्रकृति की ओर लौटें।"

प्रश्न 8. आपने विभिन्न महानगरों में देश की प्रतिभाओं को मंच दिया। इसके पीछे आपकी दृष्टि क्या रही?

उत्तर: "समाज की प्रतिभाएँ जब उचित पहचान पाती हैं, तब वे और बेहतर कर पाती हैं। मैंने यह मंच निष्काम भाव से दिया ताकि नई पीढ़ी को पहचान और प्रेरणा मिले।"

प्रश्न 9. आपकी पुस्तक का विमोचन महामहिम राज्यपाल महोदय द्वारा किया गया। वह क्षण आपके लिए कैसा था?

उत्तर: "वह क्षण मेरे लिए अत्यंत गौरवपूर्ण था। यह केवल मेरी नहीं, अपितु उन मूल्यों की मान्यता थी जिन्हें मैंने जीवन में आत्मसात किया है।"

प्रश्न 10. आपके कार्यों को केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च अधिकारियों ने सराहा। क्या यह आपके लिए चुनौती का कार्य नहीं था?

उत्तर: "निश्चित ही चुनौतीपूर्ण था। परंतु जब नीयत साफ हो और कार्य समाज के हित में हो, तो आशीर्वाद और समर्थन स्वयं प्राप्त होते हैं।"

प्रश्न 11. आप विधिक शिक्षा में भी परास्नातक हैं। इसका आपके कार्य में क्या योगदान रहा?

उत्तर: "कानून समझना समाज सेवा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे अधिकारों की रक्षा और न्याय की स्थापना सुगम होती है।"

प्रश्न 12. आपने 'कॉफी टेबल बुक' के माध्यम से उत्तराखंड राज्यपाल जी के कार्यों को प्रस्तुत किया। इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था?

उत्तर: "मैं चाहता था कि उनकी दृष्टि और नीति जनता तक सही तरीके से पहुँचे। यह दस्तावेज़ प्रेरणा का स्रोत बन सके, यही उद्देश्य था।"

प्रश्न 13. आपने कितने लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया और कैसे?

उत्तर: "संख्या मैं नहीं गिनता। पर मैंने हर ऐसे युवक को सहयोग किया जो संघर्ष में था, और उसे उचित मार्गदर्शन से आगे बढ़ाया।"

प्रश्न 14. आपने पत्रकारिता और जनसंचार में भी शिक्षा ली है। इसका किस प्रकार प्रयोग किया आपने समाज सुधार में?

उत्तर: "मीडिया जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम है। मैंने इसका उपयोग सामाजिक संदेश, स्वास्थ्य जागरूकता और लोक-नेतृत्व के प्रचार हेतु किया।"

प्रश्न 15. इतने सारे कार्यों के बीच आपकी ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत क्या है?

उत्तर: "आत्मबोध, भारतभूमि की सेवा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की अदम्य इच्छा ही मेरी ऊर्जा है। मैंने अपने जीवन को 'कर्तव्य' मानकर जिया है।"

महाजन जी रचित आलेख



सूचना स्रोत

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प्रस्तुति



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