सशक्त शिक्षिका और बहुआयामी व्यक्तित्व हैं पायल जी
✍️ भूमिका साहित्य और शिक्षा की दुनिया में पायल गुप्ता ‘पहल’ का नाम आज एक समर्पित रचनाकार, सशक्त शिक्षिका और बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में पहचाना जाता है। वर्ष 1982 में जन्मी पायल जी ने संस्कृत में स्नातकोत्तर, बी.एड. और एम.एड. की शिक्षा प्राप्त की। साहित्य की ओर उनका रुझान प्रारंभ से ही रहा, और यही जुनून उन्हें लेखन की ऊँचाइयों तक ले गया। उनका प्रथम लघुकथा-संग्रह ‘मानस आख्या’ राजस्थान साहित्य अकादमी के प्रकाशन सहयोग से प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक को अल्पज्ञ स्मृति संस्थान महिला साहित्य सम्मान 2024 से अलंकृत किया गया, जिसने पायल जी के साहित्यिक जीवन को नई दिशा दी। अब तक उनकी एक पुस्तक और छह साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाएँ विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस, वैश्विक हिंदी संस्थान, ह्यूस्टन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चयनित हुईं। वे न केवल कवयित्री और कथाकार हैं, बल्कि कुशल मंच-संचालिका और अभिनय में भी निपुण हैं। नाट्य वृंद संस्थान, अजमेर द्वारा उन्हें श्रेष्ठ अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। पायल जी की सक्रियता केवल लेखन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने RSCERT की कार्यशाला में राजस्थान साहि...