बहुआयामी प्रतिभा हैं सत्यरूपा जी

 ✨ परिचय

अवध नगरी अयोध्या की मूल निवासी और वर्तमान में अजमेर में निवासरत सत्यरूपा तिवारी बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं। साहित्य, कला, रंगमंच और अध्यापन—हर क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है। कविता लेखन और चित्रकला में निपुण, उन्होंने "अंश भक्त भगवान" और "जीव संवेदना" जैसी एकल पुस्तकों के साथ पाँच साझा संकलनों में भी अपनी रचनात्मक छाप छोड़ी है। "भारत रत्न अटल सम्मान 2024" से सम्मानित सत्यरूपा जी साहित्यिक मंचों और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय रहते हुए भोलानाथ साहित्य अकादमी की अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत हैं। आइए मिलते हैं उनसे—



🌸 साक्षात्कार

प्रश्न १. सत्यरूपा जी, आपके जीवन में कविता और चित्रकला दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। आप इन दोनों विधाओं को कैसे जोड़ती हैं?

उत्तर: "मेरे लिए कविता और चित्रकला एक ही भाव की दो अभिव्यक्तियाँ हैं। जहाँ शब्द रंग भरते हैं, वहीं रंगों में भाव बोल उठते हैं।"

प्रश्न २. आपने दो एकल पुस्तकें लिखी हैं—'अंश भक्त भगवान' और 'जीव संवेदना'। इनकी विषयवस्तु क्या है?

उत्तर: "पहली पुस्तक आस्था और भक्ति की अभिव्यक्ति है, जबकि दूसरी पुस्तक मानवीय संवेदनाओं और जीवन के गहरे अनुभवों पर आधारित है।"

प्रश्न ३. साझा संकलनों में आपकी भागीदारी को आप किस रूप में देखती हैं?

उत्तर: "साझा संकलन लेखक को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचने और अन्य रचनाकारों से जुड़ने का अवसर देते हैं। यह सामूहिक सृजन की ऊर्जा है।"

प्रश्न ४. आपने पाँच साल तक अध्यापन किया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की इंचार्ज भी रहीं। इस अनुभव ने आपके व्यक्तित्व को कैसे निखारा?

उत्तर: "अध्यापन ने मुझे धैर्य और संवाद की कला दी, जबकि सांस्कृतिक गतिविधियों ने मेरी सृजनात्मकता को मंच पर उतारने का आत्मविश्वास दिया।"

प्रश्न ५. रंगमंच पर आपके स्टेज शो को सराहना मिली। उस अनुभव को आप कैसे याद करती हैं?

उत्तर: "मंच पर प्रस्तुति दर्शकों से सीधा संवाद है। वह क्षण मेरे लिए बेहद खास रहे, क्योंकि मेरी अभिव्यक्ति को तत्काल सराहना मिली।"

प्रश्न ६. आपकी चित्रकला में विशेष रुचि है। इस कला की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: "बचपन से ही रंगों और आकृतियों ने मुझे आकर्षित किया। जब भी समय मिलता, मैं चित्र बनाती थी। धीरे-धीरे यह शौक पहचान में बदल गया।"

प्रश्न ७. आपकी रचनाएँ नियमित रूप से प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होती हैं। आपको कैसा अनुभव होता है?

उत्तर: "यह मेरे लिए संतोष और प्रेरणा का स्रोत है। जब पाठक मेरी रचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो लगता है कि मेरी संवेदनाएँ सही दिशा में पहुँच रही हैं।"

प्रश्न ८. भोलानाथ साहित्य अकादमी की अध्यक्ष के रूप में आपकी प्राथमिकताएँ क्या हैं?

उत्तर: "मेरी प्राथमिकता है—नए लेखकों को मंच देना, साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाना और परंपरा व आधुनिकता को जोड़ना।"

प्रश्न ९. "भारत रत्न अटल सम्मान" प्राप्त करना आपके लिए कितना विशेष रहा?

उत्तर: "यह मेरे लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों है। इस सम्मान ने मुझे और गंभीरता से साहित्य व कला के क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा दी।"

प्रश्न १०. भविष्य के लिए आपकी क्या योजनाएँ हैं?

उत्तर: "मैं अपनी अगली पुस्तक पर कार्य कर रही हूँ। साथ ही, साहित्य और कला को स्कूल-कॉलेज स्तर तक पहुँचाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहती हूँ।"

👉 यह संवाद स्पष्ट करता है कि सत्यरूपा तिवारी जी साहित्य और कला की दुनिया में केवल सृजन नहीं कर रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी प्रेरित कर रही हैं।

सूचना स्रोत

 

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