वृत्तांत (दुर्लभ संयोग)
दुर्लभ संयोग आज का दिन अपने भीतर कई अप्रत्याशित संयोगों और आत्मीय मुलाकातों को समेटे हुए था। नंबरदार परिवार की किशोरी नाती नमो को उसके घर छोड़ने का दिन था। प्रातः लगभग साढ़े सात बजे नमो के नाना राजीव उसे लेकर रवाना हुए। सफर का माध्यम आधुनिक और सुविधाजनक रैपिड रेल रहा। यात्रा के दौरान नमो की मासूम चंचलता और उसके नाना का स्नेहिल संरक्षण पूरे सफर को आनंदमय बनाते रहे। अंतिम स्टेशन तक पहुंचने के बाद आगे की दूरी थ्री-व्हीलर के माध्यम से पूरी की गई। घर पहुंचते ही नमो के दादा श्री ओम प्रकाश जी की खुशी देखते ही बनती थी। जैसे ही उन्होंने अपनी प्यारी पोती को देखा, उनके चेहरे पर प्रसन्नता सहज ही झलक उठी। परिवार के इस आत्मीय मिलन का वातावरण अभी बना ही था कि इसी दौरान नमो के दादा जी के एक मिमित्र प्रकाश जी, जो रिश्तेदारी से भी जुड़े हुए थे, वहां आ पहुंचे। फिर क्या था—तीनों सज्जनों के मध्य सामयिक विषयों, सामाजिक परिस्थितियों और पारिवारिक संदर्भों को लेकर लंबी और रोचक वार्ता प्रारंभ हो गई। संवाद का वातावरण इतना आत्मीय था कि समय का आभास ही नहीं हुआ। इसी बीच नमो के नाना ने घर की आत्मीयता में चाय औ...