श्री बद्रीनाथ धाम यात्रा संस्मरण

श्री बद्रीनाथ धाम यात्रा संस्मरण

मानव एक सामाजिक प्राणी है। समाज में ही इसका विकास संभव है। सामाजिक संस्कार, मान्यताएं, रीति-रिवाज, धार्मिक तीर्थ यात्राएं, मेले, उत्सव व त्यौहार आदि कार्यों से ही मानव का सामाजिक मान सम्मान समाज में बढ़ता है। इसी कड़ी में श्री बद्रीनारायण विशाल तीर्थ धाम की यात्रा करने का पिछले दिनों मेरा भी संयोग बना।

पूर्व में कोई तैयारी नहीं थी बस मन में दृढ़ इच्छा और विश्वास था कि जीवन में एक बार बद्रीनाथ धाम की यात्रा जरूर करेंगे।

इस विश्वास व ईश्वर कृपा की बदौलत अचानक 11 मई 2026 को बड़ी बहन जो जिला हेडक्वार्टर टोंक रहती है। उसका फोन आया कि भैया 15 तारीख से बद्री विशाल धाम की यात्रा के लिए मैं जा रही हूं। तुम्हारे भी सरकारी विद्यालयों की छुट्टियां लग गई है। आप और भाभी भी मेरे साथ चले तो मुझे अच्छा लगेगा। मोबाइल फोन पर बद्रीनाथ धाम की यात्रा के समाचार सुनकर मन में दबी इच्छा के पूर्ण होने की खुशी से मैंने हाथों हाथ ही बहन को हां करके उससे आवश्यक सामग्री की जानकारी लेकर तैयारी करने लगा।

15/05/2026 वार शुक्रवार

इस दिन ठीक सांयकाल 5:30 बजे एक छोटी यात्री बस से हम बाईस यात्री, तीन ड्राइवर, दो हलवाई व एक उनके साथ काम करने वाला इस प्रकार कुल अट्ठाईस लोग बद्रीनाथ धाम की यात्रा के लिए निकल गए। यात्रियों में बच्चे, जवान और वरिष्ठजन सभी शामिल थे। बीच रास्ते में सभी ने प्रथम दिवस को घर से लाए हुए भोजन को आपस में मिल जुलकर बांटकर खाया। इस दौरान सभी में अनौपचारिक बातचीत भी हुई जिससे आपस में एक-दूसरे से जानकारी बढी उससे आपसी विश्वास व प्रेम भाव पैदा हुआ। अलग-अलग तरह के भोजन का सामूहिक रूप से खाने का आनंद अनोखा व रोचक रहा। इसके बाद रातभर गाड़ी दिल्ली- मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी की तरह दौड़ रही थी। शासन के इस हाइवे निर्माण की सभी ने बहुत ही सराहना की। सुबह के 6:00 बजे हरिद्वार में हम सब पहुंच गए। एक होटल पर सभी शौच, मंजन व चाय-पानी आदि कार्यों सेे निवृत्त होकर हम सब वापस बस में बैठकर हर की पैड़ी हरिद्वार गंगा स्नान के लिए निकल गए। हर की पैड़ी पर स्नान करने की हर यात्री की इच्छा होती है इसलिए वहां पर भीड़ बहुत ज्यादा होना स्वाभाविक है पर हम सब यात्रियों ने ईश्वर की कृपा से सकुशल गंगा स्नान किया।

16/05/2026 वार शनिवार

प्रातःकाल गंगा स्नान के बाद यात्रा बस ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। 11 बजे ऋषिकेश पहुंच कर एक धर्मशाला में दो कमरे किराए पर लिए गए।

एक पुरुषों के लिए व दूसरा स्त्रियों के वास्ते। वहीं पर हलवाई जी ने सबको नाश्ते में गरम-गरम आलू के कोफ्ते और जलेबी का मजेदार नाश्ता करवाया। नाश्ते के बाद सबने गर्मा-गर्म चाय का आनंद लिया। थोड़ी देर विश्राम के बाद बद्रीनाथ धाम जाने के लिए सभी यात्री नगर निगम कार्यालय ऋषिकेश अपना निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करवाने पहुंचे। यह अतिआवश्यक है।इसके बिना कोई भी यात्री आगे की यात्रा नहीं कर सकता है।उसके बाद यात्री बस का भी फिटनेस सर्टिफिकेट बना व टैक्स जमा हुआ। तीनों वाहन चालकों का भी लाइसेंस देखा गया उनका अनुभव जांचा गया। इसके बाद उनको आगामी यात्रा के लिए वाहन चलाने की स्वीकृति दी गई। ऋषिकेश से ठीक दिन के 2:00 बजे सभी यात्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा के लिए रवाना हो गए। बस में मधुर भजन संगीत के साथ महिलाओं के नृत्य से भक्तिमय माहौल बना।

यहाँ से बद्रीनाथ धाम 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साथ ही यह पूरा का पूरा रास्ता पर्वतों को काटकर बनाया हुआ है। जिसमें अत्यंत विकट मोड़ आते हैं। सारा रास्ता बहुत संकरा है और ऊपर से यहाँ आने जाने वाले वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा रहती है। एक तरफ पर्वत तो दूसरी ओर अलकनंदा नदी बह रही है। यदि जरा सी भी चूक हो जाए तो बस का अता-पता भी नहीं लगे। 1000 मीटर से भी ज्यादा नीचे गहराई को देखकर यात्री हमेशा डरे व सहमे रहते हैं। ईश्वर से कुशलता की प्रार्थना करते रहते हैं। इस रास्ते पर शाम को 7 बजे के बाद सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन कम हो जाता है।

हम सब यात्रियों ने भी बीच रास्ते में ही एक धर्मशाला में रुकने व शाम का भोजन बनाने का निश्चय किया। भोजन में चपाती व लौकी की सब्जी बनाई गई। सबका यहीं रात्रि विश्राम हुआ।

17/05/2026 वार रविवार

भगवान बद्रीनाथ केदारनाथ की कृपा से सभी यात्री कुशलतापूर्वक रात के 8:00 बजे श्री बद्रीनाथ विशाल के दरबार में जा पहुंचे। वहाँ पहुंचते ही सबसे पहले धर्मशाला में गाड़ी की पार्किंग हुई। वहाँ का मौसम बहुत ही ठंडा था। इसलिए सभी यात्री साथ में लाए सर्दी के कपड़े व शाॅल आदि पहनकर तैयार हुए। साथ में लाए पूजा का सामान, चने की दाल, चावल, बद्रीनाथ भगवान के लिए कपड़े, लक्ष्मी जी के लिए चुनरी, सुहाग का सामान आदि जरूरी सामान लेकर आराध्य देव श्री बद्रीनाथ विशाल जी के दर्शन करने के लिए चल पड़े।

बद्रीनाथ धाम के स्थान की छटा बहुत ही अनोखी, अद्भुत व सुहावनी थी। प्रकृति का मनोरम दृश्य देख सबने स्वर्ग लोक जैसी अनुभूति की। बद्रीनाथ धाम चारों ओर से गगनचुंबी पर्वत की चोटियों से अच्छादित, पास में ही जीवनदायिनी अलकनंदा बड़े जोरदार वेग से बहती हुई। बर्फीले पहाड़ देखकर सब रोमांच से भर उठे। सबने एक साथ जयकार लगाया।जय हो बद्रीनाथ विशाल की जय हो। 

भव्य और दिव्य विशाल मुख्य मंदिर देखकर मन प्रसन्न हो गया। दर्शनार्थियों का उमड़ता सैलाब देखकर मन में चिंता होने लगी कि आज दर्शन हो भी पाएंगे या नहीं।

सभी यात्री चार-पांच किलोमीटर लंबी दर्शनार्थियों की कतार में जाकर खड़े हो गए। यहाँ आए हुए सभी भक्तों की आस्था व भक्ति का उत्साह व उमंग देखते ही बनता था। लगातार तीन घंटे तक प्रतीक्षा करने के बाद में सभी ने भगवान बद्रीनाथ के दर्शन किए। 

दर्शन पाकर सबका मन प्रफुल्लित हो गया क्योंकि यहाँ के लिए ऐसा कहा जाता है कि यहां वही आ पाता है, जिसे बद्रीनाथ भगवान बुलाते हैं सभी यात्रियों ने रात को 11:00 बजे धर्मशाला पहुंचकर दाल बाटी का जायकेदार भोजन का आनंद लिया। उसके बाद सभी अपने-अपने कमरों में सुबह जल्दी 5:00 बजे उठकर एक बार पुनः बद्रीनाथ भगवान के दर्शन करने की सूचना के साथ विश्राम करने चले गए।

18/05/2026 वार सोमवार

सभी यात्री प्रातः काल जल्दी उठकर बद्रीनाथ धाम पर गए। वहाँ गर्म पानी के तप्त कुंड में स्नान करके पुनः बद्रीनाथ भगवान के दर्शन करने की पंक्ति में लग गए। सभी के दो घंटे पंक्ति में खड़े रहने के बाद विशाल धाम बद्रीनाथ भगवान के दर्शन हो पाए। सभी यात्री दर्शन करने के बाद धर्मशाला में जाकर रोटी दाल का भोजन किया। और! वहाँ से भारत देश का प्रथम गांव माणा में सरस्वती नदी का उदगम स्थल, वेदव्यास की गुफा, गणेश जी की गुफा, भीम पुल आदि देखे। वहाँ पर भारत की प्रथम चाय की दुकान पर चाय की चुस्कियों का आनंद लिया। उसके बाद सुखपाल धाम में सुखदेव जी महाराज के दर्शन करने के लिए रवाना हो गए। रास्ते में एक धर्मशाला में सभी ने शाम का खाना खाया और विश्राम किया। 

19/05/2026 वार मंगलवार

प्रातकाल जल्दी से सभी दैनिक कार्य से निवृत्त होकर सुखपाल धाम दर्शन के लिए निकल गए। रास्ते में देवप्रयाग में अलकनंदा सरस्वती, गंगा के संगम पर स्नान किया और नाश्ते में मीठी व नमकीन खिचड़ी सबने खाई।

उसके बाद बस आगे की यात्रा के लिए रवाना हो गई। सुखपाल में शाम को 6:00 बजे हम सब जा पहुंचे। धर्मशाला के बाहर से ही हमने टैम्पू किराए पर करके वहाँ स्थित बालाजी धाम, गणेश धाम, गंगा घाट व सुखदेव महाराज के दर्शन किए।

सभी यात्री रात्रि के 8:00 बजे धर्मशाला पहुंच गए। रात को राजस्थान का प्रसिद्ध भोजन चूरमा बाटी का सब आनंद लेकर सभी यात्री बस में अपने अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। 

20/05/2026 वार बुद्धवार

यात्री बस सुबह के 10 बजे सभी यात्रियों को सकुशल लेकर टोंक पहुंच गई। अपने अपने घर प्रस्थान करने से पहले सभी यात्रियों ने यात्रा की प्रति सदस्य राशि 7000 रुपए (मय खाना व नाश्ते) का भुगतान किया। तत्पश्चात बद्रीनाथ भगवान का जय कारा लगाते हुए व एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए अपने अपने घरों की ओर चले गए।

झलकियाँ






















हंसराज हंस 

(शिक्षक व कवि) 

टोंक (राजस्थान) 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति






टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिक्षा का उजास (संशोधित) - श्री कुलदीप महुआ

🌼 ज्योति वही, जो मार्ग दिखाए 🌼

संघर्ष, संस्कृत और सफलता का संगम