मानव संपदा डॉ. के.के. शर्मा का साक्षात्कार

समझें

यह कि आखिर इस साक्षात्कार का अध्ययन करने की जरूरत आखिर क्या और क्यों है? 

तो साथियो, किसी भी साक्षात्कार का अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति के अनुभव, विचार और दृष्टिकोण के पीछे की सोच को उजागर करता है। इससे हमें विषय की गहरी समझ, विश्लेषण करने की क्षमता और व्यवहारिक जीवन में उसके अनुप्रयोग के तरीके मिलते हैं। साक्षात्कार को ध्यानपूर्वक पढ़ना हमें न केवल प्रेरित करता है, बल्कि हमारी सोच को व्यापक बनाकर सही निर्णय लेने में भी सहायक होता है।

मानव संपदा डॉ. के.के. शर्मा का साक्षात्कार

(अजमेर के प्रख्यात साहित्यकार, कवि एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अजमेर के अध्यक्ष)

प्रश्न १. डॉ. शर्मा जी, आपका जन्म और बचपन किस प्रकार बीता और किसने आपको लेखन की ओर प्रेरित किया?

उत्तर. "मेरा जन्म 18 मार्च 1971 को अजमेर में हुआ। बचपन से ही किताबों का शौक था। घर के वातावरण में साहित्यिक चर्चाएँ होती थीं, जिससे लेखन की प्रेरणा मिली। विद्यालयी जीवन में पहली कहानी लिखी और वहीं से लेखन की यात्रा प्रारंभ हुई।"

प्रश्न २. पिछले 20 वर्षों के लेखन अनुभव को आप कैसे वर्णन करेंगे?

उत्तर. "यह यात्रा मेरे लिए साधना जैसी रही है। पिछले दो दशकों में कहानी, कविता और साहित्य के विविध रूपों में लिखने का अवसर मिला। समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिससे नए पाठकों तक पहुँचने का अवसर मिला।

प्रश्न ३. आप किन विषयों पर अधिकतर लिखते हैं और आपकी लेखन शैली की विशेषता क्या है?

उत्तर. "मैं मुख्य रूप से सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन के गहरे अनुभवों पर लिखता हूँ। मेरी शैली सरल, भावनात्मक और पाठकों से संवाद स्थापित करने वाली है, जिससे वे स्वयं को जोड़ पाते हैं।"

प्रश्न ४. आठ सौ से अधिक काव्य गोष्ठियों में सहभागिता का अनुभव कैसा रहा?

उत्तर. "यह अनुभव अद्वितीय रहा। ऑनलाइन और ऑफलाइन मंचों पर विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों से मिलने और संवाद का अवसर मिला। इससे न केवल मेरी लेखन क्षमता समृद्ध हुई बल्कि विचारों का आदान-प्रदान भी बढ़ा।"

प्रश्न ५. साहित्य भूषण, साहित्य रत्न और नवरत्न सम्मान प्राप्त करना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर. "यह सम्मान मेरे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। ये न केवल मेरी साहित्यिक यात्रा की स्वीकृति हैं, बल्कि यह विश्वास भी दिलाते हैं कि मेरा लेखन समाज के लिए सार्थक है।"

प्रश्न ६. अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अजमेर के अध्यक्ष पद का दायित्व निभाते हुए आपकी प्राथमिकताएँ क्या हैं?


उत्तर. "मेरी प्राथमिकता है कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, नवोदित लेखकों को मंच मिले और हिंदी साहित्य की गरिमा को और ऊँचाई पर पहुँचाया जाए।"

प्रश्न ७. वर्तमान समय में साहित्य और कविता की भूमिका आप कैसे देखते हैं?

उत्तर. "आज के समय में साहित्य समाज को जागरूक करने, भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कविता भावनाओं को शब्द देती है और लोगों को जोड़ने का कार्य करती है।"

प्रश्न ८. युवा पीढ़ी को आप लेखन और साहित्य की ओर आकर्षित करने के लिए क्या संदेश देंगे?

उत्तर. "मैं युवाओं से कहूँगा कि वे अपने अनुभवों को लिखने से न डरें। साहित्य केवल पुस्तकें पढ़ने का नाम नहीं, बल्कि जीवन को महसूस करने और उसे अभिव्यक्त करने का साहस है।"

प्रश्न ९. आपकी पसंदीदा रचना कौन-सी है, जो आपको आज भी विशेष रूप से याद है?

उत्तर. "मेरी कई रचनाएँ मेरे दिल के करीब हैं, लेकिन मेरी एक कविता जो मानवीय करुणा पर आधारित है, उसे मैं विशेष मानता हूँ। उसने कई पाठकों को प्रभावित किया और मुझे लेखक होने का वास्तविक अर्थ समझाया।"

प्रश्न १०. भविष्य में आपके साहित्यिक लक्ष्य क्या हैं?

उत्तर: "आने वाले समय में मैं अपनी कहानियों और कविताओं का संग्रह प्रकाशित करना चाहता हूँ, साथ ही साहित्यिक मंचों के माध्यम से नई पीढ़ी को लेखन के लिए प्रेरित करने का कार्य जारी रखना चाहता हूँ।"

सूचना स्रोत

पाठ्य विस्तार


प्रस्तुति



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिक्षा का उजास (संशोधित) - श्री कुलदीप महुआ

🌼 ज्योति वही, जो मार्ग दिखाए 🌼

संघर्ष, संस्कृत और सफलता का संगम