गजब की कंटेंपरेरी आर्टिस्ट हैं रचना जी

भूमिका

कला मात्र रंगों और आकृतियों का खेल नहीं है, बल्कि वह समाज का आईना और विचारों की आवाज़ भी है। समकालीन कला की दुनिया में रचना जी का नाम उन कलाकारों में शुमार है, जिन्होंने अपनी सृजनशीलता को न केवल सौंदर्य की दृष्टि से प्रस्तुत किया, बल्कि समाज के गंभीर और ज्वलंत मुद्दों—विशेषकर *महिला सशक्तिकरण* और *महिला उत्पीड़न*—को अपने कैनवास पर उकेरा।

स्कूल की किताबों से शुरू हुई उनकी कला-यात्रा, बी.एफ.ए. और एम.एफ.ए. की पढ़ाई, और फिर जहाँगीर आर्ट गैलरी से लेकर ललितकला अकादमी और गुर्जर महोत्सव तक की लंबी प्रदर्शनी यात्रा, उनकी पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले गई।

जनचेतना जागरण फाउंडेशन के साथ मिलकर वह अब कला को समाज परिवर्तन का माध्यम बना रही हैं। प्रस्तुत है उनके साथ यह विशेष साक्षात्कार—

गजब की कंटेंपरेरी आर्टिस्ट हैं रचना जी

प्रश्न १. रचना जी, आपकी कला-यात्रा की शुरुआत कब और कैसे हुई?

उत्तर: "मेरी शुरुआत बहुत ही साधारण रही। स्कूल के दिनों में मैं गणित की किताब में सवाल हल करने से ज्यादा चित्र बनाने में मन लगाती थी। मेरी अध्यापिका ने ही मुझे प्रेरित किया कि मैं कला के लिए ही बनी हूँ। उसी समय से यह यात्रा शुरू हुई और अब तक निरंतर चल रही है।"

प्रश्न २. आपके अनुसार कला आपके लिए क्या मायने रखती है?

उत्तर: "मेरे लिए कला केवल आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज से संवाद करने और समाज को दिशा देने का ज़रिया है। यह मेरी संवेदनाओं और चिंताओं को कैनवास पर उतारने का रास्ता है।"

प्रश्न ३. आपने बी.एफ.ए. और एम.एफ.ए. करने के बाद विभिन्न गैलरियों में प्रदर्शनियाँ कीं। उनमें से कौन-सी प्रदर्शनी आपके लिए सबसे खास रही?

उत्तर: "प्रत्येक प्रदर्शनी खास रही है, लेकिन जहाँगीर आर्ट गैलरी और गुर्जर महोत्सव मेरे दिल के बहुत करीब हैं। वहाँ दर्शकों से जो प्रतिक्रिया और सराहना मिली, वह मेरे लिए अविस्मरणीय है।"

प्रश्न ४. आपके कार्यों का केंद्रबिंदु अधिकतर महिलाएँ क्यों रहती हैं?

उत्तर: ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाएँ समाज का मूल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा उपेक्षित भी। मैंने महिलाओं की पीड़ा, संघर्ष और शक्ति को नज़दीक से महसूस किया है। मेरी कोशिश रहती है कि कला के माध्यम से उनकी आवाज़ और ताक़त को सामने लाऊँ।"

प्रश्न ५. महिला सशक्तिकरण पर काम करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: "बचपन से ही मैंने अपने आसपास कई महिलाओं को अन्याय और असमानता झेलते देखा। आगे चलकर महिला उत्पीड़न की खबरें और अनुभवों ने मुझे झकझोर दिया। तब लगा कि कला केवल सुंदरता तक सीमित न रहे, बल्कि बदलाव का साधन भी बने।"

प्रश्न ६. आपकी कला शैली को आप कैसे परिभाषित करेंगी?

उत्तर: "मेरी कला समकालीन है, लेकिन उसमें परंपरा और आधुनिकता दोनों का मेल दिखाई देता है। मैं रंगों के माध्यम से स्त्री की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ।"

प्रश्न ७. आपकी कला को देखते हुए दर्शकों की पहली प्रतिक्रिया सामान्यत: कैसी होती है?

उत्तर: "अक्सर लोग कहते हैं कि मेरी पेंटिंग्स सीधे दिल को छू लेती हैं। कई लोग भावुक हो जाते हैं, तो कई लोग महिला सशक्तिकरण पर सोचने को प्रेरित होते हैं। यह मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।"

प्रश्न ८. जनचेतना जागरण फाउंडेशन के साथ आपका जुड़ाव कैसे हुआ?

उत्तर: "जब मैंने देखा कि यह संस्था समाज के गहरे मुद्दों पर काम कर रही है, तो मुझे लगा कि मेरी कला उनके मिशन का हिस्सा बन सकती है। आज हम साथ मिलकर महिलाओं से जुड़े जटिल मुद्दों जैसे ‘वूमेन एमपावरमेंट’ और ‘वूमेन एब्यूज’ पर काम कर रहे हैं।"

प्रश्न ९. आज के दौर में एक महिला कलाकार होने के नाते आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

उत्तर: "चुनौतियाँ तो बहुत हैं—कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, कभी समाज की सोच और कभी आर्थिक परिस्थितियाँ। लेकिन जब आपके पास लक्ष्य स्पष्ट हो, तो ये चुनौतियाँ ही प्रेरणा बन जाती हैं।"

प्रश्न १०. आपको मिले पुरस्कार आपके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: "पुरस्कार प्रेरणा देते हैं, आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। लेकिन मेरे लिए असली पुरस्कार तब होता है जब कोई महिला मेरी पेंटिंग देखकर कहती है—“आपने मेरी भावनाओं को चित्रित कर दिया।”

प्रश्न ११. क्या आप मानती हैं कि कला समाज में परिवर्तन ला सकती है?

उत्तर: "बिल्कुल। कला दिल और दिमाग पर सीधा असर करती है। कई बार एक पेंटिंग या मूर्ति उतना कह जाती है, जितना लंबे भाषण भी नहीं कह पाते।"

प्रश्न १२. नई पीढ़ी के कलाकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "मैं यही कहूँगी कि केवल प्रसिद्धि और बाजार को ध्यान में रखकर कला न करें। अपनी संवेदनाओं, अपने समाज और अपनी आत्मा से जुड़कर कला रचें। तभी आपकी कला जीवित रहेगी।"

प्रश्न १३. आपके आगामी प्रोजेक्ट्स क्या हैं?

उत्तर: "अभी मैं एक विशेष सीरीज़ पर काम कर रही हूँ, जिसमें महिला के अलग-अलग रूप—ममता, संघर्ष, विद्रोह और शक्ति—को दर्शाऊँगी। साथ ही महिला अधिकारों से जुड़े अभियानों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही हूँ।"

प्रश्न १४. आप अपने दर्शकों और समाज को क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "मेरा यही संदेश है कि महिला केवल सहानुभूति की पात्र न बने, बल्कि सम्मान और समान अवसर पाए। और कला को केवल मनोरंजन न समझकर समाज परिवर्तन का साधन भी मानें।"

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प्रस्तुति





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