अनीता चेची की साहित्यिक यात्रा और सांस्कृतिक साधना

कविता की पीयूषधारा

अनीता चेची की साहित्यिक यात्रा और सांस्कृतिक साधना

भूमिका

सृजनशीलता जब साधना बन जाए, तो उसका स्वर हर भाषा में गूंजता है और उसका प्रभाव हर संवेदनशील हृदय में उतरता है। हरियाणा की मिट्टी से उभरीं हिंदी साहित्य की समर्पित साधिका, अनीता चेची न केवल एक विदुषी शिक्षिका हैं, बल्कि वे एक प्रखर कवयित्री, कुशल कथाकार, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संवेदनशील व्यक्तित्व और संस्कृति की सच्ची संरक्षिका भी हैं।

उनकी साहित्यिक यात्रा कविताओं की सरिता, कहानियों की पीयूषधारा और मंचीय अभिव्यक्ति की गूंज से समृद्ध है। उनका काव्य केवल सौंदर्य की अभिव्यक्ति नहीं, अपितु संवेदना, चेतना और स्त्री-अस्मिता की आवाज़ भी है। वह शिक्षा के क्षेत्र में एक निष्ठावान अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं, साथ ही हिंदी की गरिमा को देश-विदेश के मंचों पर बखूबी प्रस्तुत कर रही हैं।

यह साक्षात्कार उनके जीवन, साहित्य, संघर्ष, प्रेरणा और दृष्टिकोण की झलक देने का एक प्रयास है, ताकि उनके अनुभव नई पीढ़ी के लिए दिशा और ऊर्जा बनें।

साक्षात्कार

प्रश्न 1: आपके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कैसे हुई? इसके प्रेरक कौन रहे?

उत्तर: मेरी साहित्यिक यात्रा बचपन में ही आरंभ हो गई थी। मेरे पिताजी श्री तुरमल मास्टर जी शिक्षा और संस्कारों के प्रतीक थे, जिन्होंने मुझे पढ़ने-लिखने की दिशा दी। वहीं माँ श्रीमती राजवती देवी से मुझे जीवन के सहज सौंदर्य और सहनशीलता की प्रेरणा मिली। कविता लिखना मेरे लिए आत्मा की बात कहने जैसा रहा है।

प्रश्न 2: आपकी अब तक प्रकाशित कृतियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: मेरे तीन प्रमुख साहित्यिक संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं —

1. काव्यांजलि (काव्य संग्रह)

2. पीयूषका (कहानी संग्रह)

3. मंतव्य (काव्य संग्रह)

इनके माध्यम से मैंने समाज, स्त्री-संवेदना, और सांस्कृतिक मूल्यों को स्वर दिया है।

प्रश्न 3: आपने देशभर के विभिन्न मंचों पर कविता पाठ किया है। इसका अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: यह अनुभव अत्यंत भावपूर्ण रहा है। सोशल मीडिया मंचों ने भाषा की सीमाएं समाप्त कर दी हैं। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक मेरे शब्दों ने श्रोताओं से संवाद किया है। देश के कई राज्यों में मंचीय काव्यपाठ करके यह महसूस होता है कि कविता दिलों को जोड़ती है।

प्रश्न 4: आपकी रचनाओं की विशेषता क्या है? कोई प्रिय विषय?

उत्तर: मेरी रचनाओं की विशेषता उनमें समाहित सजीव अनुभूतियाँ हैं। मैं स्त्री विमर्श, समाज की विसंगतियाँ, प्रकृति और मानवीय रिश्तों को विशेष रूप से चित्रित करती हूँ। ‘कविता मेरे लिए आत्मा की व्याख्या है।’

प्रश्न 5: आपने कई सम्मानों से साहित्यिक जगत में पहचान बनाई है। किन-किन पुरस्कारों से आपको नवाज़ा गया?

उत्तर: मुझे काशी कविता मंच वाराणसी, अंतर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद, मानसरोवर साहित्य अकादमी, बेटियां एवं कथा कुंज साहित्यिक संस्था, भारत स्काउट एंड गाइड, सूरदास साहित्य सम्मान और श्री माखनलाल चतुर्वेदी सम्मान आदि द्वारा अनेक साहित्यिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान मेरे लिए दायित्व हैं।

प्रश्न 6: वर्तमान में आप कौन से महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं?

उत्तर: मैं हरियाणा सरकार में द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में हिंदी प्रवक्ता पद पर कार्यरत हूँ। इसके अतिरिक्त मैं कथा कुंज साहित्य परिषद की हरियाणा इकाई की अध्यक्ष भी हूँ।

प्रश्न 7: आपकी रचनाएँ किन-किन पत्रिकाओं और मंचों पर प्रकाशित हुई हैं?

उत्तर: मेरी रचनाएँ अंतरराष्ट्रीय अभ्युदय पत्रिका, संस्कार भारती के काव्य संकलन, अमृत राजस्थान पत्रिका आदि में प्रकाशित होती रही हैं। साथ ही सोशल मीडिया मंचों पर काव्य पाठ और कार्यशालाओं में भी मेरी निरंतर भागीदारी रहती है।

प्रश्न 8: साहित्य के अलावा आपकी अन्य अभिरुचियाँ क्या हैं?

उत्तर: गायन, वादन, नृत्य और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियाँ मेरी आत्मा की खुराक हैं। साहित्य इन सभी का समन्वय है, इसलिए मेरा मन हमेशा साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में रमता है।

प्रश्न 9: आज की युवा पीढ़ी को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: मैं यही कहना चाहूंगी कि अपनी भाषा, अपनी जड़ों से जुड़ें। साहित्य केवल शब्द नहीं, चेतना का माध्यम है। जो भी करें पूरे मन से करें और कभी सीखना न छोड़ें।

प्रश्न 10: भविष्य में किन योजनाओं पर कार्य कर रही हैं?

उत्तर: मैं स्त्री-केंद्रित एक उपन्यास और एक शोधात्मक रचना पर कार्य कर रही हूँ। साथ ही मेरी इच्छा है कि हरियाणा की लोकसंस्कृति पर आधारित कुछ प्रामाणिक कार्य हिंदी जगत को दूँ।

समापन टिप्पणी:

डॉ. अनीता चेची साहित्य की उस परंपरा की वाहक हैं, जहाँ शब्दों के माध्यम से आत्मा का संप्रेषण होता है। वे न केवल लेखिका हैं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सच्ची शिक्षक भी हैं। उनका साहित्य नई पीढ़ी को भाषा, विचार और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

संपर्क

ओमेक्स सिटी CC1, जीटी रोड, पलवल, हरियाणा

सूचना स्रोत


पाठ्य उन्नयन


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