जनजागरूकता और समाजसेवा में जुटी एक प्रतिभा

भूमिका

हर इंसान के जीवन में ऐसा कोई क्षेत्र होता है, जहाँ वह केवल अपना कर्तव्य निभाकर ही नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। डाक विभाग का एक कर्मचारी होने के नाते मेरा मानना है कि सेवा केवल ऑफिस तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह जनता के जीवन में विश्वास, सुविधा और सुरक्षा पहुँचाने का माध्यम बनती है। यही भावना मुझे प्रेरित करती है कि मैं अपनी ड्यूटी के साथ-साथ हर पल देशहित में जनजागरूकता और समाजसेवा में जुटा रहूँ। यह भूमिका केवल मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो अपने काम को समर्पण और निष्ठा से निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है।                                               अरुण मोहन शंखधर 

भाव

मैं डाक विभाग का एक समर्पित कर्मचारी हूँ और गर्व के साथ कह सकता हूँ कि मेरा हर कार्य देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित है। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं को आम जनता तक पहुँचाना मेरा मुख्य उद्देश्य है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में, मैं जिंगल्स, कविताएँ, भाषण, मंच संचालन और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करता हूँ।

एक सच्चे टीम खिलाड़ी की तरह, मैं खुद को अपनी टीम का गोलकीपर या विकेटकीपर मानता हूँ—जहाँ ज़िम्मेदारी केवल अपने काम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी टीम को जीत की राह पर ले जाने में अहम भूमिका निभाता हूँ।

डाक विभाग की सेवाएँ आज हर नागरिक के जीवन से जुड़ी हुई हैं—

अल्प बचत योजनाएँ जो हर वर्ग के लिए जनहितकारी और अधिक ब्याज देने वाली हैं।

सीनियर सिटीजन खाता, हमारे सम्मानित बुजुर्गों की सुरक्षित वृद्धावस्था के लिए।

सुकन्या समृद्धि योजना, हर बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए।

डाक जीवन बीमा और ग्रामीण डाक जीवन बीमा, करोड़ों लोगों के भरोसे का प्रतीक।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक, आधार सेवा, पासपोर्ट सेवा, जो आधुनिक तकनीक के साथ जन-जन तक पहुँची हैं।

इन योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुँचे, यही मेरा लक्ष्य है।

सिर्फ विभागीय कर्तव्यों तक सीमित न रहते हुए, मैं अपने ऑफ-टाइम में भी देशहित और समाजसेवा में निरंतर जुटा रहता हूँ। जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के मार्गदर्शन में, मैंने कई राष्ट्रीय अभियानों में योगदान दिया है, जैसे—

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण

जल संचय और संचारी रोग जागरूकता

मेरी माटी, मेरा देश

चंद्रयान और G20 जनजागरूकता

आज़ादी का अमृत महोत्सव, देशभक्ति और स्कूल चलो अभियान

यातायात नियमों और योग के प्रति जागरूकता

मेरी शैक्षणिक यात्रा में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ सिविल इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण शामिल है। मैंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर अप्रेंटिस के रूप में सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली में भी सेवा दी है।

सरस्वती माता की कृपा से, मैं पिछले तीस वर्षों से आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहा हूँ और अखिल भारतीय डाक सांस्कृतिक सम्मेलनों में उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर पदक जीत चुका हूँ। मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, और विभिन्न सरकारी आयोजनों में मंच संचालन से लेकर पुलिस प्रशासन की 26 जनवरी परेड तक, मुझे देश और समाज की सेवा का अवसर मिला है।

मेरे परिवार, डाक विभाग के अधिकारियों, और जनपद के उच्च अधिकारियों का स्नेह, मार्गदर्शन और सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। यही कारण है कि मुझे समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर सम्मान और प्रोत्साहन मिलता रहा है।

मैं मानता हूँ कि जब हम अपने काम को सिर्फ नौकरी न मानकर, उसे देश सेवा और समाज कल्याण का माध्यम बना लें, तो हमारा हर प्रयास राष्ट्र निर्माण में योगदान बन जाता है।

साक्षात्कार

प्रेरणा पथ: एक विशेष साक्षात्कार

बहुआयामी व्यक्तित्व श्री अरुण मोहन शंखधर से संवाद

संवाददाता: नमस्कार! आज हमारे साथ हैं एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी, मोटिवेशनल स्पीकर, गायक, एंकर, और समाजसेवी श्री अरुण मोहन शंखधर जी, जो भारतीय डाक सेवा, दूरदर्शन, और कई सरकारी मंचों पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। आपका स्वागत है सर।

अरुण मोहन शंखधर: नमस्कार! बहुत-बहुत धन्यवाद, आपने मुझे इस मंच पर आमंत्रित किया।

प्रश्न 1: सबसे पहले आप अपने बचपन और प्रारंभिक जीवन के बारे में कुछ बताइए।

उत्तर:

मेरा जन्म 4 अक्टूबर 1967 को हुआ। मेरे पिताजी स्वर्गीय श्री ललित मोहन शंखधर का स्नेह और अनुशासन मेरे जीवन की नींव बना। शिक्षा के साथ-साथ कला, संगीत और सामाजिक सरोकारों की ओर मेरा झुकाव शुरू से ही रहा।

प्रश्न 2: आपके व्यक्तित्व की कई परतें हैं—आप गायक हैं, एंकर हैं, मोटिवेशनल स्पीकर भी। आपने यह विविधता कैसे साधी?

उत्तर:

जब उद्देश्य स्पष्ट हो और सेवा का भाव हो, तो रास्ते अपने आप बनते हैं। मैं AIR और दूरदर्शन से जुड़ा सीनियर आर्टिस्ट हूँ, साथ ही ऑल इंडिया पोस्टल कल्चरल मीट का भी हिस्सा रहा हूँ। मंच संचालन की मेरी यात्रा कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों तक पहुँची, जहाँ मुझे मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और सांसदों के समक्ष कार्यक्रम एंकर करने का अवसर मिला।

प्रश्न 3: आपने कोविड काल में भी जनजागरूकता हेतु गीत और भाषण तैयार किए। उस अनुभव को साझा कीजिए।

उत्तर:

कोविड के समय मैंने जनमानस को जागरूक करने के लिए ‘टीका लगवाओ’ जैसे गीतों के माध्यम से संदेश दिया। मेरा उद्देश्य था—भय नहीं, समझदारी से काम लें। लोगों ने मेरी बातों को सुना और अपनाया, ये मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।

प्रश्न 4: आपने किन-किन विषयों पर लोगों को प्रेरित किया?

उत्तर:

मेरा प्रयास रहा है कि मैं मंच के माध्यम से स्वच्छता, बेटी बचाओ, जल-संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, मतदान जागरूकता, जैसे राष्ट्रीय अभियानों को सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाऊं।

प्रश्न 5: आपकी उपलब्धियाँ भी प्रेरणादायक हैं। हमारे पाठकों के लिए कृपया बताइए।

उत्तर:

ईश्वर की कृपा और जनसहयोग से मुझे Dak Seva Award 2019, Postal Hero Certificate, और जनपद आइकॉन (रामपुर/हापुड़) जैसे सम्मान प्राप्त हुए। ये पुरस्कार मेरे नहीं, मेरे कार्यों के हैं।

प्रश्न 6: युवाओं के लिए आपका कोई संदेश?

उत्तर:

मैं यही कहूंगा—किसी भी मंच या माध्यम से अगर आप समाज को दिशा दे सकते हैं, तो न रुकें, न झुकें। अपनी प्रतिभा को केवल अपने लिए नहीं, देश के लिए उपयोग करें। कला केवल मनोरंजन नहीं, परिवर्तन की चाबी है।

संवाददाता:

बहुत सुंदर और प्रेरणादायक विचार। श्री अरुण मोहन शंखधर जी, हम आपके उज्जवल स्वास्थ्य और सतत सेवा कार्यों की मंगलकामना करते हैं।

अरुण मोहन शंखधर:

धन्यवाद! मेरा भी प्रण यही है—"सेवा ही मेरा संकल्प है।"

सूचना स्रोत

 

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प्रस्तुति
 






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