साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च राष्ट्रीय संगोष्ठी
साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च संगोष्ठी
सहभागी प्रो. (डॉ.) राकेश राणा की आँखों-देखी
मैं जब एम.एम.एच. कॉलेज, गाज़ियाबाद के परिसर में पहुँचा, तो वहाँ का शैक्षणिक वातावरण अत्यंत ऊर्जावान और उत्साहपूर्ण दिखाई दे रहा था। भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च वास्तव में अपने विषय की गंभीरता और व्यापकता को प्रतिबिंबित कर रही थी। देश के विभिन्न भागों से आए शोधार्थियों और प्राध्यापकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया था।
उद्घाटन सत्र का प्रारंभ मुख्य आयोजक डॉ. मनोज कुमार द्वारा केंद्रीय विषय के परिचय से हुआ। उन्होंने जिस स्पष्टता और गंभीरता से विषय की आवश्यकता और प्रासंगिकता को रखा, उसने पूरे वातावरण को चिंतनशील बना दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत किया।
मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल साइंस लैबोरेटरी, अहमदाबाद, गुजरात से पधारे प्रो. एच. ओ. वत्स का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समकालीन महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का समय नवाचार और बहुविषयी अनुसंधान का है।
यह जानकर गर्व हुआ कि यह संगोष्ठी Defence Research and Development Organisation (डी.आर.डी.ओ.), नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित है। देशभर से 165 शोध-पत्रों का पंजीकरण इस बात का प्रमाण था कि विषय ने व्यापक रुचि उत्पन्न की है।
उद्घाटन सत्र का मुख्य व्याख्यान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रो. बीरपाल द्वारा दिया गया। उन्होंने अत्यंत सहज भाषा में समझाया कि किस प्रकार विज्ञान, तकनीक और अंतर्विषयी अनुसंधान सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य हैं। डी.आर.डी.ओ. से आए श्री अजय कुमार ने 21वीं सदी को तकनीक की सदी बताते हुए अनुसंधान में आत्मनिर्भरता पर बल दिया।
IIT BHU, वाराणसी के प्रो. ए. के. श्रीवास्तव ने *Nature* जर्नल में प्रकाशित अपने शोधों के उदाहरणों से शोध की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मेरठ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल मलिक ने विषय की अकादमिक गहराइयों को सरल शब्दों में स्पष्ट किया।
नेशनल साइंस लैबोरेटरी के सीनियर वैज्ञानिक प्रो. भानु ने विज्ञान के सामाजिक योगदान को रेखांकित किया। वहीं All India Institute of Medical Sciences Gurgaon से आईं युवा वैज्ञानिक डॉ. सुमन तँवर का मेडिकल साइंस पर केंद्रित व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा।
उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. गार्गी ने कुशलता से किया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत पुष्प-रोपण भेंट कर किया गया, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश दे रहा था। *एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट* का विमोचन एक गरिमामय क्षण था। प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा—प्रतिभागियों की जिज्ञासाएँ और वक्ताओं के संतुलित उत्तर कार्यक्रम को जीवंत बना रहे थे।
स्नातकोत्तर विद्यार्थियों से भरा ऑडिटोरियम इस बात का संकेत था कि युवा पीढ़ी विज्ञान और अनुसंधान के प्रति जागरूक है। तकनीकी सत्रों में लगभग 65 प्रतिभागियों ने शोध-पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए। तीन समानांतर सत्रों का सुव्यवस्थित संचालन आयोजन की उत्कृष्ट तैयारी को दर्शा रहा था।
समापन पर सेमिनार संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया और आगे के सत्रों की घोषणा की। मेरे लिए यह संगोष्ठी केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और नवाचार का जीवंत मंच सिद्ध हुई।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब विज्ञान, तकनीक और विभिन्न विषयों का समन्वय होता है, तब अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास का आधार बन जाता है।
सुर्खियाँ
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति













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