स्मृति शेष

भूमिका

कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और संवेदनाएँ ही संवाद बन जाती हैं। किसी प्रिय आत्मा का देहावसान केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, वह परिवार, स्मृतियों और संबंधों के एक पूरे संसार में फैलती हुई निस्तब्ध पीड़ा का विस्तार होता है। श्रीमती विमला देवी जी के देवलोकगमन का समाचार भी इसी गहन संवेदनात्मक अनुभूति से मन को भर देता है।

“अंतर्संबंध” ब्लॉग सदैव मनुष्यता, रिश्तों की ऊष्मा और संवेदनाओं के साझा स्पंदन का मंच रहा है। इस मंच पर हम केवल शब्द नहीं रखते, बल्कि उन भावों को स्थान देते हैं जो संबंधों की आत्मा से जुड़ते हैं। आज जब नेगी परिवार शोक की इस कठिन घड़ी से गुजर रहा है, तब प्रत्यक्ष उपस्थिति से अधिक आवश्यक है आत्मीय सहभागिता और करुण संवेदना।

इन्हीं अंतरंग भावों के साथ, “उलझन सुलझन” टीम की ओर से यह शोक संदेश एक सामूहिक श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है—ऐसी श्रद्धांजलि, जिसमें स्मृतियों का आदर, संबंधों की पीड़ा और दिवंगत आत्मा के प्रति विनम्र नमन समाहित है। यह संदेश केवल शोक की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस ममतामयी व्यक्तित्व के प्रति कृतज्ञ स्मरण भी है, जिनकी स्मृतियाँ सदैव परिवार और अपनों के हृदय में जीवित रहेंगी।

शोक सन्देश



श्रद्धेय उपस्थित सज्जनो,

आज की इस शोक सभा में हमारा हृदय अत्यंत व्यथित है। नियति के इस अटल सत्य के आगे शब्द भी मौन हो जाते हैं और भावनाएँ ही अभिव्यक्ति का माध्यम बनती हैं। श्रीमती विमला देवी जी का देवलोकगमन न केवल नेगी परिवार के लिए, अपितु उन्हें जानने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका सरल स्वभाव, ममता से भरा व्यक्तित्व और परिवार के प्रति समर्पण, सदैव स्मृतियों में जीवंत रहेगा।

यद्यपि “उलझन सुलझन” टीम व्यक्तिगत रूप से इस शोक सभा में उपस्थित नहीं हो पा रही है, तथापि हमारी संवेदनाएँ, हमारी श्रद्धा और हमारे भाव पूर्ण रूप से शोकाकुल परिवार के साथ हैं। हम इस गहन दुःख की घड़ी में श्री आनन्द सिंह नेगी जी एवं समस्त परिवारजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

इन्हीं समग्र करुण भावों और सामूहिक संवेदनाओं के साथ “उलझन सुलझन” टीम की ओर से प्रस्तुत है यह विनम्र शोक संदेश, जो हमारे हृदय की गहराइयों से निकली श्रद्धांजलि का स्वर है।


आज चारों ओर घर में छा गयी पूरी उदासी।

विमलाजी के दर्श को है हर कोई आँख प्यासी!

आनंदजी का पूर्णानंद शोकमय अब हो गया है। 

सूरज-मीना योगेश्वर पुत्र गम में खो गया है।


अनामिका बन अनमनी सी सास की यादों में खोई। 

पूजा-मनीषा पतियों के संग आज नयना भर के रोईं।

तन्मय-शिवांश मानो जैसे तन्मयता ही भूल बैठे। 

यादों के आकर बवन्डर चुभ रहे हैं शूल के जैसे।


विमलाजी थीं पुण्य मूरत पर गति पा गयी हैं। 

ईश के चरणों में जगह उच्चतम ही पा गयी हैं। 

पूरे ही परिवार को दु:ख सहन की दे ईश शक्ति। 

विधि की ये जान इच्छा मन करे ईश्वर की भक्ति।

रचनाकार - श्री कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण' 

(उलझन सुलझन के लिए)


25-02-2026

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