प्रेम सिंह निठारी का आत्मकथ्य

भूमिका

उलझन सुलझन के नैतिक समन्वयक श्री प्रेम सिंह निठारी को जब उनके क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्र भैंसी में एक अत्यंत सार्थक और प्रेरक ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला में प्रतिभाग का अवसर मिला तो उन्होंने सर्वप्रथम अपने घरेलू कार्यदायित्व निपटाए और फिर प्रतिभाग की तैयारी की।

प्रेम सिंह निठारी का आत्मकथ्य

मैं, प्रेम सिंह तोमर, ग्राम निठारी का निवासी और समाज के सामूहिक विकास में विश्वास रखने वाला एक साधारण कार्यकर्ता, यह साझा करते हुए गर्व का अनुभव करता हूँ कि हमारे क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्र भैंसी में एक अत्यंत सार्थक और प्रेरक ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, भौतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा छात्र नामांकन में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद स्थापित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी श्री पंकज अग्रवाल एवं खंड विकास अधिकारी श्रीमती ज्योति बाला द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया—जो ज्ञान, विवेक और संस्कार का प्रतीक है।

कार्यक्रम में ग्राम भैंसी, कैलाशनगर, बिहारीपुर एवं दबीट स्थित विद्यालयों के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर यह सिद्ध किया कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएँ किसी से कम नहीं हैं। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और शिक्षा के साथ संस्कृति के संतुलन का संदेश दिया।

इस अवसर पर ग्राम प्रधानों एवं प्रधानाध्यापकों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। स्वयं अधिक छात्र नामांकन कराने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, ताकि उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहन मिल सके और अन्य विद्यालय भी प्रेरित हों।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान संघ ब्लॉक अध्यक्ष श्री ओमवीर सिं ने की। मंच पर श्री मोतीलाल, मैं स्वयं, श्री चौधरी खान, श्री अजयराम, श्री धर्मवीर, श्री अजीत, नोडल संकुल शिक्षक श्री कुलदीप जैन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक उत्तरदायित्व निभाने का संकल्प दोहराया।

मेरे लिए यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गाँव, विद्यालय और समाज के बीच सेतु बनने का प्रयास था। मेरा विश्वास है कि जब प्रशासन, शिक्षक, जनप्रतिनिधि और समाज एक साथ आते हैं, तब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम नहीं रहती—वह भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है।

सुर्खियों द्वारा प्रतिभाग पुष्टि



 

झलकियाँ 


 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 










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