वरिष्ठ अध्यापिका एवं साहित्यकार हैं रेखा शर्मा जी
✨ साक्षात्कार : वरिष्ठ अध्यापिका एवं साहित्यकार रेखा शर्मा
भूमिका
हिन्दी साहित्य जगत में रेखा शर्मा जी एक ऐसा नाम है, जिन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है, बल्कि साहित्यिक सृजन की विविध विधाओं—कविता, कहानी, लघुकथा, पाती लेखन और आलेख—में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। राजस्थान के बीकानेर शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापिका के रूप में कार्यरत रहते हुए भी उन्होंने साहित्य को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखा। अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी, साझा संकलनों में योगदान तथा कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित होना उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण है। प्रस्तुत है, उनके जीवन, लेखन और दृष्टिकोण पर आधारित एक सारगर्भित बातचीत।
बातचीत
प्रश्न १. रेखा जी, आपके जीवन की शुरुआत शिक्षा और साहित्य दोनों से जुड़ी रही। आपको सबसे पहले साहित्य की ओर किसने प्रेरित किया?
उत्तर: "बचपन से ही हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति गहरी आत्मीयता रही। विद्यालय के दिनों में कविताएँ लिखना शुरू किया और शिक्षकों का प्रोत्साहन मिला। यही प्रेरणा धीरे-धीरे मेरे लेखन की दिशा बन गई।"
प्रश्न २. आप शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापिका हैं। अध्यापन और लेखन में सामंजस्य कैसे बना पाती हैं?
उत्तर: "अध्यापन और लेखन मेरे लिए परस्पर पूरक हैं। विद्यार्थियों से संवाद मुझे नए अनुभव देता है, और साहित्य मुझे उन्हें सहज भाषा में प्रस्तुत करने की शक्ति देता है।"
प्रश्न ३. आपकी सबसे प्रिय साहित्यिक विधा कौन-सी है?
उत्तर: "मुझे कविता और पाती लेखन विशेष रूप से प्रिय हैं। पाती लेखन भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है और कविता मेरे लिए आत्मा की आवाज़।"
प्रश्न ४. आपने कई साझा संकलनों में अपनी रचनाएँ दी हैं। इनमें से आपका सबसे प्रिय संकलन कौन-सा है?
उत्तर: "जाग्रति" और "काव्य कस्तूरी" मेरे दिल के काफ़ी करीब हैं, क्योंकि इनमें समाज और जीवन की गहरी संवेदनाएँ अभिव्यक्त हुई हैं।"
प्रश्न ५. आपको अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया है। आपके लिए सबसे यादगार सम्मान कौन-सा रहा?
उत्तर: "राष्ट्रपति भवन में 2011 का 'सम्मान समारोह' और 'महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन उदयपुर' का सम्मान मेरे जीवन के अविस्मरणीय क्षण रहे।"
प्रश्न ६. आपके पाती लेखन का मूल संदेश क्या है?
उत्तर: "पाती लेखन मेरे लिए केवल पत्र नहीं, बल्कि आत्मीय संवाद है। इसमें रिश्तों की गहराई, मिट्टी की पुकार और मानवीय संवेदना का सजीव रूप होता है।"
प्रश्न ७. साहित्य में आपके आदर्श या प्रेरणा-स्रोत कौन हैं?
उत्तर: "महादेवी वर्मा जी की संवेदनशीलता और हरिवंश राय बच्चन जी का जीवन-दर्शन मुझे हमेशा प्रेरित करता है।"
प्रश्न 8: आज के समय में आप साहित्य की क्या भूमिका मानती हैं?
उत्तर: "आज साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और मानवीय मूल्यों की स्थापना का सशक्त साधन है।"
प्रश्न ९. युवाओं को आप साहित्य के प्रति कैसे प्रेरित करना चाहेंगी?
उत्तर: "मैं चाहूँगी कि युवा साहित्य को केवल परीक्षा या पाठ्यक्रम तक न सीमित रखें। वे इसे जीवन की अभिव्यक्ति और आत्म-विकास का माध्यम बनाएं।"
प्रश्न 10: भविष्य में आपके साहित्यिक लक्ष्य क्या हैं?
उत्तर: "मेरा प्रयास है कि मैं अपने लेखन से समाज में सकारात्मक संदेश दूँ और विशेष रूप से 'पाती लेखन' को एक मजबूत साहित्यिक विधा के रूप में स्थापित करूँ।"
👉 यह इंटरव्यू औपचारिक और प्रेरणादायक ढंग से तैयार किया गया है, ताकि पाठक उनके व्यक्तित्व और योगदान दोनों को समझ सकें।
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