मुख्य अतिथि – डॉ. रूपाली वशिष्ठ का स्ववक्तव्य
भूमिका
यह है पीएच-डी. विद्वान रूपाली वशिष्ठ का स्ववक्तव्य (Self-Statement), जो ‘अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान महासम्मेलन – 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में उनके द्वारा महसूस किया गया।
स्वविवरण
मुख्य अतिथि – रूपाली वशिष्ठ (पीएच-डी. विद्वान) का स्ववक्तव्य
(इतिहास संशोधक, महाराजा अग्रसेन गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड)
"आज ‘अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान महासम्मेलन – 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना मेरे लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि एक चेतना का अनुभव है — उस चेतना का, जो राष्ट्र निर्माण के हर स्तर पर मौन तपस्या कर रही प्रतिभाओं के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
मैंने अपने शोध-कार्य के माध्यम से यह अनुभव किया है कि इतिहास केवल अतीत का बखान नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का एक जीवंत दस्तावेज है। गढ़वाल अंचल की ऐतिहासिक विरासत पर मेरा शोध कार्य, भारत की सांस्कृतिक आत्मा को समझने की एक विनम्र कोशिश रही है। इस कृति का विमोचन केवल मेरे लेखन का पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी का प्रारंभ है — भारत को उसके भूले हुए गौरव से पुनः जोड़ने की जिम्मेदारी।
मुझे विश्वास है कि राष्ट्र का उत्थान केवल नीतियों से नहीं, अपितु उन प्रतिभाओं की समर्पित साधना से होता है, जो बिना किसी प्रचार की अपेक्षा के, समाज में परिवर्तन की लौ जलाए हुए हैं। यही प्रतिभाएँ, यही सृजनशीलता, और यही संस्कार, ‘विकसित भारत’ के मजबूत स्तंभ हैं।
मैं इस महासम्मेलन के आयोजकों को हृदय से धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक आत्मा को एक मंच पर समाहित कर, राष्ट्रधर्म की भावना को जीवंत किया। इस मंच पर उपस्थित प्रत्येक प्रतिभा, एक संदेश है – कि जब समाज, संस्कृति और सेवा एक दिशा में संगठित होते हैं, तब राष्ट्र केवल भूगोल नहीं रहता, वह आत्मबल बन जाता है।
मेरा यह संकल्प है कि मैं अपने शोध और लेखन के माध्यम से भारत के ऐतिहासिक बोध को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य सतत करती रहूँगी। और साथ ही, सभी जाग्रत प्रतिभाओं से मेरा आग्रह है – अपनी ऊर्जा का एक अंश राष्ट्र को अर्पित करें, क्योंकि सच्ची राष्ट्रसेवा केवल कर्म से नहीं, संस्कारों की निरंतरता से होती है।
सूचना स्रोत
जय भारत।
रूपाली वशिष्ठ (पीएच-डी. विद्वान)
मुख्य अतिथि
अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान महासम्मेलन 2025
पाठ्य उन्नयन
चैट जीपीटी
प्रस्तुति



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