अनुसंधान से नवाचार तक डॉ. कविता खटाना के साथ एक संवाद

भूमिका

अनुसंधान का संसार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारे जीवन की प्रत्येक धड़कन में समाया हुआ है — हम जो भोजन करते हैं, जो दवाएं लेते हैं, जो टेक्नोलॉजी उपयोग करते हैं और जो पर्यावरणीय निर्णय लेते हैं — सब कुछ शोध से प्रभावित होता है। एक प्रबुद्ध शोधकर्ता समाज के लिए वह दीपस्तंभ होता है, जो अनदेखे क्षेत्रों में रोशनी करता है।

डॉ. कविता खटाना, जो वर्तमान में जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, ग्रेटर नोएडा में कार्यyरत हैं, अपने प्रभावशाली अनुसंधान कार्य के माध्यम से विज्ञान को सामाजिक कल्याण से जोड़ने का अद्भुत कार्य कर रही हैं। उनके नाम पर नब्बे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च पेटेंट्स, पचास से अधिक रिसर्च पेपर, चौबीस पुस्तकें, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गहन सहभागिता, और अनेक पुरस्कार हैं। प्रस्तुत है उनसे एक विशेष संवाद, जिसमें उलझन सुलझन की फरीदाबाद की स्थानीय संपादक ज्योति भड़ाना ने अनुसंधान के विविध पहलुओं, समाज पर उसके प्रभाव, युवा शोधकर्ताओं के लिए सुझाव और उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर बातचीत की। उनका मुख्य काम कैंसर तथा कोविड - 19 पर है। 

बातचीत

प्रश्न १. आपके शोध कार्य की प्रेरणा का मूल स्रोत क्या रहा है?

उत्तर: "मेरे शोध की प्रेरणा प्रकृति की जटिलता और समाज की समस्याओं से मिलती है। ग्रीन केमिस्ट्री और बायोइनफॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में कार्य करने के पीछे मेरा उद्देश्य रहा है – वैज्ञानिक समाधान के माध्यम से समाज को बेहतर बनाना।"

प्रश्न २. आपने जिन नब्बे से अधिक पेटेंट्स पर कार्य किया, उनमें से कोई एक ऐसा है जो आपके दिल के सबसे करीब है?

उत्तर: "हाँ, एक पेटेंट जो ग्रीन बायोकेमिकल से संबंधित है और वॉटर प्यूरीफिकेशन के लिए इको-फ्रेंडली मटेरियल से जुड़ा है, वह मुझे बहुत प्रिय है क्योंकि वह पर्यावरण के साथ सीधा ताल्लुक रखता है।"

प्रश्न ३. क्या आपको लगता है कि भारत में रिसर्च को अभी भी उतना महत्त्व नहीं दिया जा रहा, जितना चाहिए?

उत्तर: "कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है, परंतु अभी भी रिसर्च को करियर के रूप में चुनने में युवा हिचकते हैं। रिसर्च को रोजगार और नवाचार से जोड़ना बहुत ज़रूरी है।"

प्रश्न ४. ग्रीन केमिस्ट्री के क्षेत्र में आपके अनुभव क्या रहे हैं?

उत्तर: "यह एक रोमांचक और सामाजिक रूप से उपयोगी क्षेत्र है। इसमें हम रसायनों को इस तरह से डिजाइन करते हैं कि वे पर्यावरण के लिए हानिकारक न हों। इससे क्लीन टेक्नोलॉजी को बल मिलता है।"

प्रश्न ५. आपके अनुसार, आज के युवा शोधार्थियों को किन मूलभूत बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: "जिज्ञासा, धैर्य और नैतिक अनुसंधान दृष्टिकोण — ये तीन स्तंभ हैं। बिना इन मूल्यों के शोध अधूरा है।"

प्रश्न ६. पोस्टडॉक्टरल शोध अनुभव ने आपकी दृष्टि को कैसे समृद्ध किया?

उत्तर: "शिव नादर विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक कार्य के दौरान मैंने इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च का महत्त्व सीखा। एक ही समस्या को विभिन्न दृष्टिकोण से देखने की क्षमता वहीं से विकसित हुई।"

प्रश्न ७. आप R&D सेल और IIC जैसे सेल्स का संचालन करती हैं। इनका उद्देश्य क्या है?

उत्तर: "ये सेल छात्रों और फैकल्टी को नवाचार, स्टार्टअप, और प्रोजेक्ट निर्माण की ओर प्रेरित करते हैं। यह रिसर्च को अकादमिक फ्रेम से निकाल कर व्यवहारिक दुनिया से जोड़ता है।"

प्रश्न ८. अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट्स हासिल करने का अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: "बहुत चुनौतीपूर्ण, लेकिन संतोषजनक। हर देश का अपना पेटेंट सिस्टम होता है, और अलग सोच को समझना खुद को समृद्ध करता है।"

प्रश्न ९. क्या रिसर्च में महिलाओं के लिए कुछ अलग चुनौतियाँ हैं?

उत्तर: "हाँ, सामाजिक जिम्मेदारियाँ और संतुलन की अपेक्षा अधिक होती है। लेकिन अगर समर्थन हो, तो महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में असाधारण कर सकती हैं।"

प्रश्न १०. रिसर्च को कैसे समाज के लिए अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है?

उत्तर: "जब हम रिसर्च को समस्या-आधारित (problem-based) बनाते हैं, तब ही यह समाज के लिए उपयोगी बनता है। हर रिसर्च का अंतिम लक्ष्य मानवता की सेवा होना चाहिए।"

प्रश्न ११. आपकी पुस्तकें किन-किन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं?

उत्तर: "मेरी पुस्तकें ग्रीन केमिस्ट्री, पर्यावरणीय जैवप्रौद्योगिकी, बायोइनफॉर्मेटिक्स और रिसर्च मेथडोलॉजी जैसे विषयों पर हैं। कुछ पुस्तकों में मैंने छात्रों को गाइड करने वाले टूल्स भी दिए हैं।"

प्रश्न १२. भारत को अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र पर कैसे और मजबूत बनाया जा सकता है?

उत्तर: "इंडस्ट्री-एकेडेमिया लिंक को मजबूत कर, स्टार्टअप्स को रिसर्च सपोर्ट देकर, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर हम यह लक्ष्य पा सकते हैं।"

प्रश्न १३. क्या कभी ऐसा क्षण आया जब आपने रिसर्च छोड़ने का सोचा हो?

उत्तर: "कभी-कभी थकान होती है, लेकिन अपने उद्देश्य की याद और छात्रों की प्रगति देखकर हर बार ऊर्जा पुनः प्राप्त हो जाती है।"

प्रश्न १४. आपका कोई प्रिय उद्धरण या जीवन-मंत्र जो शोध में आपकी प्रेरणा बना हो?

उत्तर: "विज्ञान केवल तथ्यों की खोज नहीं, बल्कि भविष्य को आकार देने की प्रक्रिया है।" – यही मुझे रोज़ प्रेरित करता है।

प्रश्न १५. आपकी भविष्य की क्या योजनाएँ हैं?

उत्तर: "मेरा लक्ष्य है एक मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च सेंटर स्थापित करना, जहाँ युवा वैज्ञानिक सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए मिलकर काम करें।"

सूचना स्रोत


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