स्काई इज द लिमिट संबंधी विचार
स्काई इज द लिमिट संबंधी विचार
प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया का आत्मकथ्य
"जब मैं विद्यालय के बच्चों को देखता हूँ, तो मुझे केवल उनके वर्तमान अंक या कक्षाएँ नहीं दिखतीं, बल्कि उनका भविष्य दिखता है। आज की पीढ़ी अत्यंत तेज, जिज्ञासु और संभावनाओं से भरी हुई है, परंतु उन्हें सही दिशा, प्रेरणा और सकारात्मक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। मेरे मन में यही विचार बार-बार उठ रहा था कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के विचारों का आकाश भी विस्तृत हो।
मैं यह भली-भाँति समझता हूँ कि एक विद्यालय केवल पढ़ाने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला होता है। ऐसे में आवश्यक था कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण और बड़े सपने देखने की क्षमता विकसित की जाए। इसी सोच के साथ मेरे मन में ‘स्काई इज द लिमिट’ जैसी प्रेरक कार्यशाला आयोजित करने का विचार आकार लेने लगा।
मेरे मन में यह भी चल रहा था कि शिक्षक और विद्यार्थी—दोनों को समान रूप से प्रेरणा की आवश्यकता होती है। यदि शिक्षक उद्देश्यपूर्ण, संवेदनशील और जागरूक होंगे, तो विद्यार्थियों का विकास स्वतः ही सही दिशा में होगा। इसलिए मैंने ऐसे वक्ता को आमंत्रित करने का विचार किया, जो केवल ज्ञान ही न दे, बल्कि जीवन-दृष्टि भी दे सके।
इसी क्रम में मेरे मन में श्री विजय कुमार राज का नाम अत्यंत स्वाभाविक रूप से आया। उनके अनुभव, शिक्षण दृष्टिकोण और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के बारे में मैं पूर्व से ही अवगत था। मुझे विश्वास था कि वे बच्चों को केवल लक्ष्य प्राप्ति ही नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, संघर्ष और आत्मविश्वास का वास्तविक अर्थ भी समझा सकेंगे।
मैंने यह सोचकर उन्हें आमंत्रित किया कि उनके शब्द बच्चों के मन में नई ऊर्जा भरेंगे और शिक्षकों को भी अपने दायित्व की गहराई का पुनः बोध कराएंगे। मेरे लिए यह कार्यक्रम मात्र एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक ऐसा प्रयास था, जो बच्चों के मन में यह विश्वास स्थापित करे कि उनकी क्षमताओं की कोई सीमा नहीं है।
अन्ततः मेरे मन की यही भावना थी कि यदि हम समय-समय पर ऐसे प्रेरक व्यक्तित्वों को विद्यालय से जोड़ते रहें, तो शिक्षा का वातावरण अधिक जीवंत, प्रेरणादायी और उद्देश्यपूर्ण बन सकता है। ‘स्काई इज द लिमिट’ केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को आकाश देने की एक सच्ची पहल है।”
सूचना स्रोत
प्रधानाचार्य श्री प्रवेंद्र दहिया जी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति











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