गणित का भय नहीं, गणित से मित्रता - श्री प्रमोद साबू
गणित का भय नहीं, गणित से मित्रता
भूमिका
आज के समय में गणित केवल एक विषय नहीं, बल्कि तार्किक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और आत्मविश्वास का आधार माना जाता है। फिर भी बड़ी संख्या में बच्चे गणित के नाम से ही घबराने लगते हैं। यह भय धीरे-धीरे उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सीखने की स्वाभाविक इच्छा को प्रभावित करता है।
इसी चुनौती को समझते हुए एक अनुभवी यांत्रिक अभियंता (Mechanical Engineer) ने अपने चार दशकों से अधिक के मार्गदर्शन अनुभव को एक पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है—Math Fear to Math Freedom। यह पुस्तक केवल गणित पढ़ाने का प्रयास नहीं करती, बल्कि उन कारणों को खोजने का प्रयास करती है जिनकी वजह से बच्चे गणित से दूर होने लगते हैं। पुस्तक का उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच एक ऐसा सेतु बनाना है जो गणित को भय का नहीं, बल्कि आनंद और आत्मविश्वास का विषय बना सके।
आज हम पुस्तक के रचनाकार से बातचीत कर रहे हैं, ताकि उनके अनुभव, दृष्टिकोण और इस पुस्तक के पीछे की प्रेरणा को समझ सकें।विशेष साक्षात्कार
Math Fear to Math Freedom के लेखक श्री प्रमोद साबू जी से बातचीत
प्रश्न १. सबसे पहले, इस पुस्तक के लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
उत्तर: "वर्षों तक बच्चों और अभिभावकों के साथ काम करते हुए मैंने देखा कि अधिकांश बच्चे गणित में कमजोर नहीं होते, बल्कि गणित के प्रति उनके मन में एक अदृश्य भय विकसित हो जाता है। उसी भय के कारण उनकी वास्तविक क्षमता सामने नहीं आ पाती। इस समस्या का समाधान खोजने की प्रेरणा ही इस पुस्तक का आधार बनी। सबसे अहम बात यह भी ध्यान में आई कि ५ से १० साल के बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन व प्रोत्साहन बचपन से मिले, तो उनका सर्वांगीण विकास होगा व भावी चुनौतियों का सामना करने में वो सक्षम होंगे अन्यथा वो जीवन भर भ्रम से बाहर नहीं निकल सकेंगे।"
प्रश्न २. आप एक यांत्रिक अभियंता हैं। इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि ने इस पुस्तक को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर: "इंजीनियरिंग हमें किसी भी समस्या की जड़ तक पहुँचने और व्यवस्थित समाधान विकसित करने की शिक्षा देती है। मैंने गणित के भय को भी एक समस्या की तरह देखा और उसके मूल कारणों का विश्लेषण किया। यही विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण पुस्तक की संरचना में दिखाई देता है। गणित में बचपन से ही मेरे अध्यापक द्वारा मेरे बेसिक्स को मजबूत बनाने से रुचि रही जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई में बहुत काम आई। फ़िर यही ज्ञान passion में बदल गया।"
प्रश्न ३. आपके अनुसार बच्चों में गणित का भय पैदा होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर: "मेरा मानना है कि अधिकांश मामलों में समस्या बच्चे नहीं होते। अत्यधिक अपेक्षाएँ, तुलना, रटने की प्रवृत्ति, आधारभूत अवधारणाओं की अस्पष्टता और असफलता का डर गणितीय भय को जन्म देते हैं। बच्चों को ५/६ की उम्र से खेल और फन से गणित के प्रति स्नेह विकसित करना चाहिये और ऐसा हो सकता है, यदि वो रुचि लेने लगें तो। यहाँ अभिभावकों का प्रतिदिन १५/२० मिनट बालकों को देना बहुत उपयोगी होता है बच्चों में गणित के प्रति लगाव उत्पन्न करने के लिए।"
प्रश्न ४. पुस्तक में बार-बार Clarity अर्थात् स्पष्टता की बात की गई है। यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: "जब बच्चे किसी अवधारणा को वास्तव में समझ लेते हैं, तब आत्मविश्वास स्वतः बढ़ता है। अस्पष्टता भय पैदा करती है, जबकि स्पष्टता स्वतंत्रता देती है। यही पुस्तक का मूल संदेश है। इसको जाने अनजाने में नेग्लेक्ट् किया गया है, कुछ अपवाद छोड़ दें तो।"
प्रश्न ५. यह पुस्तक मुख्य रूप से बच्चों के लिए है या अभिभावकों और शिक्षकों के लिए?
उत्तर: "यह पुस्तक दोनों के लिए है। बच्चे सीखते हैं, लेकिन उनके सीखने का वातावरण अभिभावक और शिक्षक बनाते हैं। इसलिए मैंने उन लोगों को भी केंद्र में रखा है जो बच्चे की सीखने की यात्रा को प्रभावित करते हैं। इसमें ज़्यादा फोकस अभिभावकों की जागरूकता और व्यावहारिक टिप्स पर है जिन्हें समय पर प्रयुक्त करना महत्वपूर्ण है, वैसे यह सभी जानते हैं, किंतु इसको गंभीरतापूर्वक लेने की ज़रूरत है, अपनी सीमाओं व समस्याओं के बावजूद भी।"
प्रश्न ६. आपकी पुस्तक अन्य गणित पुस्तकों से किस प्रकार अलग है?
उत्तर: "अधिकांश पुस्तकें गणित सिखाती हैं, जबकि यह पुस्तक पहले उस मानसिक अवरोध को समझने और हटाने का प्रयास करती है जो गणित सीखने में बाधा बनता है। यह केवल विषय नहीं, बल्कि सीखने के मनोविज्ञान पर भी बात करती है। बचपन से जॉय ऑफ लरनिंग व क्लैरिटी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, कुल मिलाकर आत्मविश्वास व स्मार्टनेस के लिये।"
प्रश्न ७. क्या यह पुस्तक केवल कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है?
उत्तर: "नहीं। यह पुस्तक उन सभी बच्चों के लिए उपयोगी है जो गणित के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। अच्छे विद्यार्थी भी इससे अपनी समझ और आत्मविश्वास को और मजबूत कर सकते हैं।सटीकता के साथ तीव्रता और दक्षता में निरंतर सुधार की संभावना हमेशा बनी रहती है।”
प्रश्न ८. आज के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: "प्रतिस्पर्धा आवश्यक है, लेकिन भय के आधार पर नहीं। जब सीखने का उद्देश्य केवल अंक रह जाता है, तब आनंद समाप्त हो जाता है। मेरा प्रयास सीखने की प्रक्रिया में आनंद और जिज्ञासा को पुनर्स्थापित करना है।"
प्रश्न ९. क्या गणितीय सफलता केवल बुद्धिमत्ता पर निर्भर करती है?
उत्तर: "बिल्कुल नहीं। निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण और आत्मविश्वास अक्सर जन्मजात प्रतिभा से अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं। बच्चों को फन व खेल खेल में गणित से डर के बजाय प्यार व संबद्धता बढ़ाकर उन्हें आगे बढ़ाया जाए तो यह एक जीवन कौशल है।"
प्रश्न १०. पुस्तक में “Math Freedom” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: "मेरे लिए Math Freedom का अर्थ है—गणित को बिना भय के समझना, प्रश्न पूछने का साहस रखना, गलतियों से सीखना और समस्या-समाधान में आनंद अनुभव करना।"
प्रश्न ११. अभिभावकों के लिए आपका सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या होगा?
उत्तर: "/अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। उनके प्रयासों की सराहना करें। गलतियों को असफलता नहीं, सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा सम। बच्चों की आरंभिक लरनिंग यात्रा के सबसे सशक्त गुरु सही मायने में अभिभावक ही हैं।"
प्रश्न १२. शिक्षकों के लिए आपकी क्या सलाह है?
उत्तर: "बच्चों को उत्तर याद कराने से अधिक महत्वपूर्ण है उन्हें सोचने के लिए प्रेरित करना। यदि कक्षा में जिज्ञासा जीवित है, तो सीखना स्वतः होगा। सीखने के आनंद को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।"
प्रश्न १३. आप चाहते हैं कि पाठक इस पुस्तक को पढ़कर कौन-सा सबसे बड़ा संदेश लेकर जाएँ?
उत्तर: "हर बच्चा सीख सकता है। यदि सही वातावरण, सही दृष्टिकोण और सही मार्गदर्शन मिले, तो गणित का भय आत्मविश्वास में बदल सकता है। सही समय पर आरंभिक अवस्था से बच्चे गणित से प्यार करें व आनंद करें जिसके लिये सभी को अपनी अपनी भूमिका निभानी है, बच्चों के उत्तम भविष्य के लिए।"
प्रश्न १४. भारत के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में आप इस पुस्तक की भूमिका को कैसे देखते हैं?
उत्तर: "यदि हम बच्चों को भयमुक्त और तार्किक सोच वाला शिक्षार्थी बना सकें, तो हम केवल अच्छे विद्यार्थी नहीं, बल्कि बेहतर समस्या-समाधानकर्ता, नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करेंगे। यही इस पुस्तक का व्यापक उद्देश्य है।"
समापन
Math Fear to Math Freedom केवल गणित सीखने की पुस्तक नहीं, बल्कि सीखने के प्रति दृष्टिकोण बदलने का एक प्रयास है। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि बच्चों के भीतर असीम संभावनाएँ होती हैं; आवश्यकता केवल उस भय को हटाने की है जो उन संभावनाओं पर पर्दा डाल देता है। एक अभियंता की विश्लेषणात्मक दृष्टि और एक मार्गदर्शक की संवेदनशीलता का यह संगम शिक्षा जगत में एक सार्थक चर्चा को जन्म दे सकता है
बच्चों पर माध्यमिक और उच्च स्तर पर अत्यधिक बोझ डालने के बजाय, प्रारंभिक अवस्था से ही सहानुभूतिपूर्ण अभिभावकत्व और स्वस्थ सीखने का वातावरण देना सबसे प्रभावशाली आधार है। आज अनेक आकर्षणों, भटकावों और प्रदर्शन के बढ़ते दबाव के कारण इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
सूचना स्रोत
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति









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