लॉन्ग डिस्टेंस सी स्विमर कु. कीर्ति नंदकिशोर भराडिया

लॉन्ग डिस्टेंस सी स्विमर कु. कीर्ति नंदकिशोर भराडिया

कु. कीर्ति नंदकिशोर भराडिया जैसी विलक्षण प्रतिभा, जिन्होंने समुद्र की प्रचंड लहरों, रात्रि के अंधकार और कठिन परिस्थितियों को चुनौती देकर विश्वस्तर पर अपनी पहचान बनाई है, उनका साक्षात्कार केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके संघर्ष, संकल्प, अनुशासन, प्रेरणा और सामाजिक संदेश को भी सामने लाना चाहिए। प्रस्तुत है एक विस्तृत एवं प्रभावशाली साक्षात्कार—


बातचीत

साक्षात्कारकर्ता: कीर्ति जी, सबसे पहले आपको आपकी अद्भुत उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई। सबसे पहले अपने बारे में और तैराकी की शुरुआत के बारे में बताइए।

कीर्ति भराडिया: "बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं बचपन से ही कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण करने का सपना देखती थी। तैराकी मेरे लिए केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वयं को चुनौती देने का माध्यम बन गई। धीरे-धीरे रुचि जुनून में बदलती गई और मैंने लंबी दूरी की तैराकी में स्वयं को समर्पित कर दिया।"

साक्षात्कारकर्ता: 12 घंटे 15 मिनट तक लगातार तैरकर विश्वविक्रम स्थापित करना किसी असाधारण साहस से कम नहीं। उस समय आपके मन में क्या चल रहा था?

कीर्ति भराडिया: "सच कहूँ तो वह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक परीक्षा भी थी। कई बार शरीर जवाब देने लगता है, लेकिन मन कहता है कि “अभी रुकना नहीं।” मैंने स्वयं को लगातार प्रेरित किया कि यदि लक्ष्य बड़ा है, तो संघर्ष भी बड़ा होगा। हर मिनट खुद को मजबूत बनाना पड़ता है।"

साक्षात्कारकर्ता: मुंबई के अरब समंदर में वर्ली सी लिंक से गेटवे ऑफ इंडिया तक 38 किलोमीटर का सफर आपने बिना रुके पूरा किया। समुद्र में स्विमिंग का अनुभव स्विमिंग पूल से कितना अलग होता है?

कीर्ति भराडिया: "बहुत अलग। पूल में सीमित वातावरण होता है, लेकिन समुद्र अनिश्चितताओं से भरा होता है। ऊँची लहरें, समुद्री धाराएँ, मौसम का अचानक बदलना, मानसिक दबाव—सब कुछ साथ चलता है। समुद्र आपको हर पल परीक्षा में डालता है।"

साक्षात्कारकर्ता: रात्रि के अंधेरे में 39 किलोमीटर तैरना अत्यंत जोखिमपूर्ण रहा होगा। क्या कभी भय महसूस हुआ?

कीर्ति भराडिया: "भय स्वाभाविक है, लेकिन यदि डर पर नियंत्रण न किया जाए तो लक्ष्य अधूरा रह जाता है। रात के अंधेरे में केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना होता है। कई बार समुद्र का सन्नाटा डराता है, लेकिन मैंने अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया।"

साक्षात्कारकर्ता: श्रीलंका से भारत तक रात्रि के तूफान में 32 किलोमीटर तैरकर विश्वविक्रम स्थापित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा होगा। उस अनुभव के बारे में बताइए।

कीर्ति भराडिया: वह मेरे जीवन के सबसे कठिन अनुभवों में से एक था। मौसम प्रतिकूल था, लहरें तेज थीं और लगातार मानसिक दृढ़ता बनाए रखना आसान नहीं था। लेकिन मेरे मन में केवल एक ही विचार था—“मुझे हार नहीं माननी।” जब मैंने भारत की धरती तक पहुँचकर अपना लक्ष्य पूरा किया, वह क्षण अविस्मरणीय था।

साक्षात्कारकर्ता: आपने पूर्णतः शाकाहारी भोजन के साथ इतनी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं। क्या आप मानती हैं कि अनुशासित भोजन सफलता में सहायक होता है?

कीर्ति भराडिया: "बिल्कुल। संतुलित और शुद्ध भोजन शरीर को ऊर्जा देने के साथ मन को भी स्थिर करता है। मैं पूर्णतः शाकाहारी हूँ और मुझे गर्व है कि मैंने इसी जीवनशैली के साथ अपने लक्ष्य हासिल किए हैं। इससे यह संदेश भी जाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन से कोई भी ऊँचाई प्राप्त की जा सकती है।"

साक्षात्कारकर्ता: आपका ब्रीद वाक्य “Support Girl Child” है। इसके पीछे क्या भावना है?

कीर्ति भराडिया: "मेरा मानना है कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, केवल उन्हें अवसर, विश्वास और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। यदि परिवार और समाज बेटियों को समर्थन दें, तो वे असंभव को भी संभव कर सकती हैं। मैं चाहती हूँ कि हर बेटी अपने सपनों को जीने का साहस करे।"

साक्षात्कारकर्ता: आपको अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। कौन-सा सम्मान आपके लिए विशेष रहा?

कीर्ति भराडिया: हर सम्मान मेरे लिए प्रेरणा है, क्योंकि वह केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता, प्रशिक्षकों और शुभचिंतकों के विश्वास का सम्मान है। विशेष बाल पुरस्कार और विभिन्न सामाजिक सम्मान मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक रहे।

साक्षात्कारकर्ता: कठिन समय में आपको सबसे अधिक प्रेरणा किससे मिलती है?

कीर्ति नंदकिशोर भराडिया: "मेरे माता-पिता, गुरुजनों और मेरे लक्ष्य से। मैं हमेशा सोचती हूँ कि अगर मैंने सपना देखा है, तो उसे पूरा करने का साहस भी रखना होगा।" 

साक्षात्कारकर्ता: आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी? 

कीर्ति नंदकिशोर भराडिया: "अपने सपनों को छोटा मत समझिए। कठिनाइयाँ आएँगी, लोग रोकेंगे भी, लेकिन यदि आत्मविश्वास मजबूत हो तो मंज़िल जरूर मिलती है। मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़िए। और सबसे जरूरी—अपने ऊपर विश्वास रखिए।"

साक्षात्कारकर्ता: अंत में, आपका भविष्य का सपना क्या है?

कीर्ति नंदकिशोर भराडिया: "मैं भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊँचा करना चाहती हूँ तथा अधिक से अधिक बेटियों को खेल और साहसिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हूँ।"

साक्षात्कारकर्ता: आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। आपने यह सिद्ध कर दिया कि संकल्प और साहस के सामने समुद्र की विशाल लहरें भी छोटी पड़ जाती हैं।

कीर्ति नंदकिशोर भराडिया: बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙏

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