सीखने की कोई उम्र नहीं होती
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
श्रीमती अंजना चावला मल्होत्रा से विशेष बातचीत
नाम: श्रीमती अंजना चावला मल्होत्रा
जन्मभूमि: कानपुर (उत्तर प्रदेश)
परिचय: गृहिणी, साहित्य साधिका, कहानी एवं लेख लेखिका
विशेष रुचियाँ: गायन, लेखन, संगीत, पुस्तक-पठन, कुकिंग एवं सतत सीखना
बातचीत
प्रश्न १. सबसे पहले अपने बारे में हमारे पाठकों को बताइए।
उत्तर: "मेरा नाम अंजना चावला मल्होत्रा है। मेरी जन्मभूमि कानपुर है। मैं एक गृहिणी हूँ और अपने परिवार के साथ रहते हुए अपनी रुचियों को भी पूरा करती हूँ। मुझे गायन, लेखन, संगीत सुनना, गुनगुनाना, स्वादिष्ट व्यंजन बनाना और अच्छी पुस्तकें पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा मानना है कि जीवन तभी सुंदर बनता है जब हम सीखना कभी बंद नहीं करते।"
प्रश्न २. लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
उत्तर: "लिखने का शौक मुझे बचपन से ही था। उस समय मैं अपने विचार केवल डायरी तक ही सीमित रखती थी। मन में बहुत कुछ होता था, जिसे शब्दों में पिरोने का प्रयास करती रहती थी। वही छोटी-छोटी शुरुआत आज साहित्यिक यात्रा का आधार बन गई।"
प्रश्न ३. शब्द सिंधु मंच से जुड़ने के बाद आपके जीवन में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: "शब्द सिंधु मंच मेरे लिए एक विद्यालय की तरह रहा। यहाँ आकर मैंने केवल कविता ही नहीं, बल्कि कहानी और लेख (आर्टिकल) लिखना भी सीखा। मंच ने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाया और मेरी लेखनी को नई दिशा दी। आज मैं अपने विचारों को अधिक परिपक्वता और प्रभाव के साथ अभिव्यक्त कर पाती हूँ।"
प्रश्न ४. परिवार ने आपकी साहित्यिक यात्रा में किस प्रकार सहयोग दिया?
उत्तर: "मेरे परिवार का सहयोग मेरी सबसे बड़ी शक्ति है। मेरी दो बेटियाँ और एक बेटा हैं। उन्होंने मुझे मोबाइल चलाना सिखाया, तकनीक से परिचित कराया और डिजिटल माध्यम पर लिखना भी सिखाया। यदि उनका साथ न होता तो शायद मैं आज इस तरह साहित्य से नहीं जुड़ पाती।"
प्रश्न ५. आपकी सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर: "मैं स्वयं को आज भी एक विद्यार्थी मानती हूँ। मैंने बहुत कुछ सीखा है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है। यही सीखने की इच्छा मुझे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।"
प्रश्न ६. आपकी रुचियाँ आपके व्यक्तित्व को कैसे समृद्ध करती हैं?
उत्तर: "संगीत मेरे मन को शांति देता है, पुस्तकें मुझे नए विचार देती हैं, लेखन मेरी भावनाओं को अभिव्यक्ति देता है और कुकिंग मुझे सृजन का आनंद देती है। इन सभी रुचियों ने मेरे व्यक्तित्व को संतुलित और सकारात्मक बनाया है।"
प्रश्न ७. नई पीढ़ी और विशेषकर गृहिणियों के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: "हर महिला के भीतर कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है। उसे पहचानिए, समय दीजिए और सीखने का साहस रखिए। उम्र कभी भी सीखने में बाधा नहीं बनती। यदि परिवार का सहयोग मिले और स्वयं पर विश्वास हो, तो हर सपना साकार किया जा सकता है।"
त्वरित परिचय (Rapid Fire)
● पसंदीदा पहचान: गृहिणी और साहित्य साधिका
● प्रिय विधा: कहानी एवं लेख लेखन
● पसंदीदा शौक: गायन, संगीत, पुस्तक-पठन, कुकिंग
● जीवन मंत्र:"सीखना कभी बंद मत कीजिए, क्योंकि ज्ञान की यात्रा जीवनभर चलती है।"
● प्रेरक विश्वास:"हर दिन कुछ नया सीखना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।"
संपादकीय टिप्पणी
श्रीमती अंजना चावला मल्होत्रा इस बात का प्रेरक उदाहरण हैं कि सीखने की कोई आयु नहीं होती। एक गृहिणी से साहित्य की सक्रिय साधिका बनने तक की उनकी यात्रा बताती है कि परिवार का सहयोग, निरंतर सीखने की जिज्ञासा और अपने सपनों पर विश्वास किसी भी व्यक्ति को नई पहचान दिला सकता है। उनका व्यक्तित्व संवेदनशीलता, सृजनशीलता और आजीवन सीखने की भावना का सुंदर संगम है।
सूचना स्रोत
श्रीमती प्रमिला त्रिवेदी
स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन
महिला प्रकोष्ठ
बेंगलुरु
प्रस्तुति
सहयोग









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