रक्षाबंधन के बहाने रिश्तों की एक नई डोर — श्री अशोक चौधरी के जज़्बात
रक्षाबंधन के बहाने रिश्तों की एक नई डोर
श्री अशोक चौधरी के जज़्बात
15 अगस्त 2026 का दिन मेरे लिए केवल स्वतंत्रता दिवस का पर्व नहीं था, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी विश्वास की अनुभूति कराने वाला एक यादगार अवसर भी रहा।
‘हमारे पुरखे न्यास’ के तत्वावधान में मेरठ जिले के चार गांवों—सारंगपुर, कोठरा, नंगला चांद और बस्तौरा—में रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में मुस्लिम गुर्जर समाज की बहनों ने हिंदू गुर्जर भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर यह संदेश दिया कि रिश्तों की मजबूती धर्म की सीमाओं से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से होती है।
सारंगपुर — आत्मीयता से हुई शुरुआत
सबसे पहला कार्यक्रम सारंगपुर गांव में सखावत गुर्जर के आवास पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक हुआ। मुस्लिम गुर्जर समाज की 25 बहनों ने 9 हिंदू गुर्जर भाइयों को राखियां बांधीं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मोमीन गुर्जर, प्रधान अकबर चौहान और इमरान गुर्जर का विशेष सहयोग रहा। डॉ. अशोक कुमार चौधरी, राजबल सिंह, दिनेश गुर्जर भडौली और धर्मेन्द्र खटाना सहित अन्य साथियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।
राष्ट्रगान के साथ जब कार्यक्रम का समापन हुआ, तो मन में यह भाव और भी गहरा हो गया कि देश की एकता केवल नारों से नहीं, बल्कि ऐसे आत्मीय संबंधों से मजबूत होती है।
कोठरा — छोटी संख्या, बड़ी भावना
इसके बाद कोठरा गांव में साबू गुर्जर के आवास पर दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां 5 मुस्लिम गुर्जर बहनों ने 5 हिंदू गुर्जर भाइयों को राखियां बांधीं।
इमरान गुर्जर और सरवट गुर्जर का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार चौधरी, राजबल सिंह, दिनेश गुर्जर भडौली, धर्मेन्द्र खटाना और चौधरी अजब सिंह मावी सहित अन्य सहयोगी उपस्थित रहे।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि किसी पहल की सफलता उसकी संख्या से नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी भावना से तय होती है।
नंगला चांद — विश्वास की कलाई पर बंधी राखी
नंगला चांद गांव में अशफाक अधाना के आवास पर अपराह्न 3:30 बजे से 4:30 बजे तक कार्यक्रम हुआ। यहां 7 मुस्लिम गुर्जर बहनों ने 8 हिंदू गुर्जर भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।
इश्तियाक गुर्जर और फैजल अखलाक़ गुर्जर का विशेष सहयोग रहा। साथ ही डॉ. अशोक कुमार चौधरी, राजबल सिंह, दिनेश गुर्जर भडौली, धर्मेन्द्र खटाना और गजेंद्र नागर सिंह सहित अन्य साथियों की सहभागिता रही।
राखी का वह धागा केवल एक कलाई पर नहीं बंधा; वह दिलों के बीच विश्वास की एक ऐसी डोर बन गया, जिसे मजबूत करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
बस्तौरा — दिन का सबसे आत्मीय पड़ाव
दिन का अंतिम कार्यक्रम बस्तौरा गांव में आजम कटारिया के आवास पर शाम 5:30 बजे से 7:15 बजे तक आयोजित हुआ। यहां 18 मुस्लिम गुर्जर बहनों ने 7 हिंदू गुर्जर भाइयों को राखियां बांधीं।
जमील तंवर का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में शराफत कटारिया, रुस्तम कटारिया, साजिद कटारिया, उदल कटारिया, इंसार गुर्जर, शोएब गुर्जर, डॉ. अशोक कुमार चौधरी, राजबल सिंह, दिनेश गुर्जर भडौली, धर्मेन्द्र खटाना और गजेंद्र नागर सिंह सहित अनेक साथियों की सहभागिता रही।
शाम ढलते-ढलते जब राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, तब मन में एक ही विचार था—आज हमने केवल राखियां नहीं बंधवाईं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का एक छोटा-सा प्रयास किया है।
मेरे लिए रक्षाबंधन का अर्थ
इन चारों गांवों में मिले अनुभव ने मेरे भीतर एक विश्वास और मजबूत किया है कि समाज को जोड़ने के लिए बड़े-बड़े मंचों की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे आत्मीय प्रयासों की आवश्यकता है।
राखी का धागा बहुत पतला होता है, लेकिन उसमें रिश्तों को बांधने की अद्भुत शक्ति होती है। यदि यही भावना समाज के स्तर पर विकसित हो जाए, तो जाति, धर्म और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर हम एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बन सकते हैं।
15 अगस्त को देश ने स्वतंत्रता का पर्व मनाया और हमने रक्षाबंधन के माध्यम से सामाजिक एकता और भाईचारे की स्वतंत्र भावना को अनुभव किया।
मेरी दृष्टि में यही हमारे पुरखों की विरासत है—
रिश्ते बनाना, रिश्ते निभाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर, समरस और सौहार्दपूर्ण समाज छोड़ जाना।
झलकियाँ
सूचना स्रोत
हमारे पुरखे न्यास
प्रस्तुति
सहयोग

































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