सृजन के अनेक रंगों में रंगी जया सूद
सृजन के अनेक रंगों में रंगी जया सूद
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी पहचान किसी एक परिचय या एक विधा तक सीमित नहीं की जा सकती। जया सूद भी ऐसा ही बहुआयामी रचनात्मक व्यक्तित्व हैं—एक समर्पित शिक्षिका, संवेदनशील कवयित्री, कहानीकार, बाल-साहित्यकार, उपन्यासकार और नाटककार। अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी—तीनों भाषाओं में उनकी सृजनात्मक अभिव्यक्ति उनकी व्यापक संवेदना और बहुरंगी प्रतिभा का परिचय देती है। दसवीं कक्षा में माँ के प्रति उमड़े सहज भावों से पहली कविता लिखने से शुरू हुई उनकी लेखकीय यात्रा आज कविता-संग्रह के प्रकाशन, विविध साहित्यिक मंचों पर सहभागिता, अनेक सम्मानों और रंगमंचीय अनुभवों तक पहुँच चुकी है। लेखन के साथ कला एवं शिल्प, रंगोली, ग्लास पेंटिंग और हास्य में उनकी रुचियाँ उनके व्यक्तित्व में रचनात्मकता के और भी सुंदर रंग भरती हैं। लंबे अंतराल के बाद 2023 से निरंतर सक्रिय हुई उनकी कलम यह संदेश भी देती है कि सृजन के लिए न कोई उम्र बाधा है, न कोई विराम अंतिम—यदि भीतर अभिव्यक्ति की लौ जीवित हो तो शब्द अपना रास्ता स्वयं बना लेते हैं। परिवार का स्नेह, माता-पिता का प्रोत्साहन और जीवनसाथी का सहयोग उनकी इस यात्रा के मजबूत आधार हैं। आइए, *उलझन सुलझन* के इस विशेष संवाद में जया सूद के इन्हीं अनेक रचनात्मक रंगों, अनुभवों, संवेदनाओं और साहित्यिक यात्रा को निकट से जानें।
सृजन के अनेक रंगों में रंगी जया सूद
शिक्षिका से कवयित्री, कहानीकार से नाटककार तक—एक बहुआयामी रचनात्मक यात्रा
साक्षात्कारकर्ता: उलझन सुलझन प्रतिनिधि
विशेष साक्षात्कार : जया सूद
प्रश्न १. जया जी, सबसे पहले आपका स्वागत है। आप शिक्षिका, कवयित्री, कहानीकार, बाल-साहित्यकार, उपन्यासकार और नाटककार के रूप में सक्रिय हैं। अपने व्यक्तित्व के इन विभिन्न रचनात्मक पक्षों से हमारे पाठकों को परिचित कराइए।
जया सूद: "बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं स्वयं को सबसे पहले एक संवेदनशील इंसान और शिक्षिका मानती हूँ। लेखन मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि अपने भीतर उठने वाले भावों, विचारों और अनुभवों को शब्द देने की प्रक्रिया है। कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और बाल-साहित्य—हर विधा मुझे अपने अलग रंग में आकर्षित करती है। शायद यही कारण है कि मैं किसी एक विधा की सीमा में स्वयं को बाँध नहीं पाती।"
प्रश्न २. आपकी लेखन यात्रा की शुरुआत दसवीं कक्षा में ‘मेरी माँ’ विषय पर लिखी कविता से हुई। उस पहली कविता की स्मृति आज भी आपके भीतर किस तरह जीवित है?
जया सूद: "वह मेरे जीवन की अत्यंत भावुक स्मृति है। उस समय कविता लिखने की कोई तकनीकी समझ नहीं थी। मैंने बस अपनी माँ के प्रति जो भाव मन में थे, उन्हें कागज पर उतार दिया। मेरी माँ ने उस कविता को बहुत प्यार दिया और उसे *Hindustan Times* के ‘Student's Corner’ में प्रकाशित करवाया। मेरे लिए वह केवल कविता का प्रकाशन नहीं था, बल्कि यह विश्वास जगाने वाला क्षण था कि मेरे भीतर भी कुछ ऐसा है जिसे शब्दों के माध्यम से दूसरों तक पहुँचाया जा सकता है।"
प्रश्न ३. इसके बाद बारहवीं कक्षा में आपकी दूसरी कविता ‘Melody in the Air’ प्रकाशित हुई। क्या उस समय आपको लगा था कि लेखन आपके जीवन का स्थायी हिस्सा बनने जा रहा है?
जया सूद: "उस समय शायद मैंने इतने बड़े रूप में नहीं सोचा था। लेकिन हाँ, भीतर कहीं लेखन के प्रति प्रेम जन्म ले चुका था। बी.एड. के दौरान भी मैं कविताएँ लिखती रही और लोगों की सराहना ने मेरा उत्साह बढ़ाया। जीवन की परिस्थितियों के कारण लेखन में एक लंबा अंतराल आया, लेकिन 2023 के बाद मैंने फिर लगातार लिखना शुरू किया। तब लगा कि जिस रचनात्मकता को इतने वर्षों तक भीतर सँजोए रखा था, वह फिर से अपना रास्ता खोज रही है।"
प्रश्न ४. आपके जीवन में एक ओर शिक्षण है और दूसरी ओर साहित्य। क्या आपको लगता है कि एक शिक्षिका होना आपके लेखन को प्रभावित करता है?
जया सूद: "निश्चित रूप से। शिक्षण ने मुझे बच्चों और युवाओं के मन को समझने का अवसर दिया है। उनकी जिज्ञासाएँ, उनकी मासूमियत, उनके प्रश्न और उनकी कल्पनाशीलता मेरे लेखन को प्रभावित करते हैं। एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, वह मनुष्य को समझता भी है। मेरे लिए कक्षा और साहित्य दोनों ही सीखने-सिखाने के जीवंत माध्यम हैं।"
प्रश्न ५. आप वर्तमान में ऑनलाइन अंग्रेजी की कक्षाएँ ले रही हैं। ऑनलाइन शिक्षण के अनुभव को आप किस रूप में देखती हैं?
जया सूद: "ऑनलाइन शिक्षण ने शिक्षा की सीमाओं को बहुत व्यापक कर दिया है। अब शिक्षक और विद्यार्थी अलग-अलग स्थानों पर होते हुए भी सहज संवाद कर सकते हैं। मेरे लिए यह केवल अंग्रेजी पढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को विकसित करने का अवसर भी है। भाषा केवल विषय नहीं है; वह विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का साधन है।"
प्रश्न ६. आपने अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी—तीनों भाषाओं में लेखन किया है। तीन भाषाओं में सृजन करते समय आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसे बदलती है?
जया सूद: "हर भाषा की अपनी आत्मा होती है। अंग्रेजी में विचारों को एक अलग संरचना और लय मिलती है, हिंदी में भावों की गहराई और सहज अभिव्यक्ति का अपना संसार है, जबकि पंजाबी में मिट्टी की खुशबू और लोक-संवेदना का अलग ही रंग महसूस होता है। मैं भाषा को केवल माध्यम नहीं मानती; वह रचना के भाव-संसार का हिस्सा बन जाती है। जिस भाव के लिए जिस भाषा की आवश्यकता महसूस होती है, शब्द उसी भाषा में सहजता से आने लगते हैं।"
प्रश्न ७. आपकी प्रकाशित कृतियों में Voice of My Thoughts नामक कविता-संग्रह विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो 2025 में प्रकाशित हुआ। इस संग्रह के पीछे की मूल भावना क्या थी?
जया सूद: "Voice of My Thoughts मेरे भीतर के विचारों और अनुभूतियों की आवाज है। कई बार हमारे मन में ऐसी बातें होती हैं जिन्हें हम किसी से कह नहीं पाते, लेकिन वे शब्दों का रूप लेकर कविता बन जाती हैं। यह संग्रह मेरे लिए आत्म-अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मैंने इसमें अपने विचारों, भावनाओं और जीवन के विभिन्न अनुभवों को ईमानदारी से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।"
प्रश्न ८. आपकी कविताओं में ‘माँ’, ‘खुद की खोज’, ‘भ्रष्टाचार’, ‘दफ्तर और देहरी’, ‘सपने सुहाने’ जैसे अलग-अलग विषय दिखाई देते हैं। आप विषय का चुनाव कैसे करती हैं?
जया सूद: "मैं विषय चुनती कम हूँ, विषय मुझे चुनते अधिक हैं। कोई घटना, कोई व्यक्ति, कोई सामाजिक स्थिति, कोई संबंध या मन में उठी कोई अनुभूति अचानक भीतर हलचल पैदा करती है और फिर शब्द आने लगते हैं। मेरी कोशिश रहती है कि मेरी रचना केवल सुंदर शब्दों का समूह न बने, बल्कि उसमें कोई भाव, विचार या संदेश भी हो।"
प्रश्न ९. आप कविता के साथ-साथ कहानियाँ भी लिखती हैं। कविता और कहानी लिखने के अनुभव में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या दिखाई देता है?
जया सूद: "कविता भावों की संक्षिप्त और सघन अभिव्यक्ति है, जबकि कहानी को पात्रों, परिस्थितियों और घटनाओं के माध्यम से अपना संसार रचना पड़ता है। कविता में कभी-कभी कुछ पंक्तियाँ ही बहुत कुछ कह देती हैं, लेकिन कहानी में पाठक को उस यात्रा पर साथ लेकर चलना पड़ता है। दोनों विधाएँ मुझे अलग-अलग प्रकार की रचनात्मक स्वतंत्रता देती हैं।"
प्रश्न १०. बाल-साहित्य लेखन की ओर आपका विशेष झुकाव है। बच्चों के लिए लिखते समय किन बातों का ध्यान रखती हैं?
जया सूद: "बच्चों के लिए लिखना आसान दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह बहुत जिम्मेदारी का काम है। बच्चों के मन पर शब्दों का गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए भाषा सरल, रोचक और कल्पनाशील होनी चाहिए। मैं चाहती हूँ कि बच्चों को मेरी रचनाओं से आनंद भी मिले, उनकी कल्पना भी उड़ान भरे और अनजाने में कोई अच्छी सीख भी उनके मन में उतर जाए। उपदेश देने के बजाय कहानी और पात्रों के माध्यम से बात कहना मुझे अधिक प्रभावी लगता है।"
प्रश्न ११. एक उपन्यासकार के रूप में आपको सबसे अधिक चुनौती किस बात में महसूस होती है?
जया सूद: "उपन्यास में केवल कहानी कहना पर्याप्त नहीं होता। पात्रों को जीवन देना पड़ता है। उनकी मनःस्थिति, संबंध, संघर्ष और परिवर्तन को विश्वसनीय बनाना पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि पाठक को लगे कि वह केवल कहानी पढ़ नहीं रहा, बल्कि उसके पात्रों के साथ जी रहा है। यही चुनौती मुझे रोमांचित भी करती है।"
प्रश्न १२. आपने नाटक लेखन के साथ रंगमंच पर अभिनय भी किया है और ‘Honey v/s Money’ में ‘गुलाबो ताई’ की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस अनुभव ने आपको भीतर से किस तरह बदला?
जया सूद: "रंगमंच मेरे लिए बहुत अलग और रोमांचक अनुभव रहा। लेखन में हम पात्रों को शब्द देते हैं, लेकिन मंच पर उन्हीं शब्दों को शरीर, आवाज, भाव और ऊर्जा देनी पड़ती है। ‘गुलाबो ताई’ का किरदार निभाना मेरे लिए विशेष अनुभव था। कॉमेडी में दर्शकों को हँसाना जितना सहज दिखाई देता है, उतना होता नहीं। समय, संवाद, भाव-भंगिमा और मंचीय उपस्थिति—सबका संतुलन आवश्यक है। Tagore Theatre, Chandigarh में प्रस्तुति और दर्शकों की प्रतिक्रिया मेरे लिए यादगार रहेगी।"
प्रश्न १३. हास्य के प्रति आपकी रुचि भी है। क्या आपको लगता है कि आज के तनावपूर्ण जीवन में हास्य की भूमिका बढ़ गई है?
जया सूद: "Subject। हास्य जीवन की कठिनाइयों को समाप्त नहीं करता, लेकिन उन्हें देखने का हमारा दृष्टिकोण बदल सकता है। स्वस्थ हास्य मन को हल्का करता है और रिश्तों में भी सहजता लाता है। मेरे विचार से हास्य ऐसा होना चाहिए जिसमें मनोरंजन हो, लेकिन किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान न हो।"
प्रश्न १४. आपकी रुचियाँ केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं। Art & Craft, Rangoli और Glass Painting जैसी कलाओं में भी आपकी दिलचस्पी है। क्या इन कलात्मक गतिविधियों और साहित्य के बीच कोई संबंध महसूस करती हैं?"
जया सूद: "बहुत गहरा संबंध है। मेरे लिए कला किसी न किसी रूप में भावों को व्यक्त करने का माध्यम है। रंगोली में रंगों और आकृतियों से भाव व्यक्त होते हैं, ग्लास पेंटिंग में रंग और प्रकाश अपना संसार बनाते हैं और साहित्य में शब्द वही भूमिका निभाते हैं। माध्यम अलग है, लेकिन भीतर की रचनात्मक ऊर्जा एक ही है।"
प्रश्न १५. आपको अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले हैं—‘शब्दों की जादूगरी’, ‘कलम के खिलाड़ी’, ‘Outstanding Poetess’, ‘कारगिल स्मृति काव्य सम्मान’ और ‘कलम के सेनानी’ आदि। सम्मान आपके लिए क्या मायने रखते हैं?
जया सूद: "सम्मान निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाते हैं। जब किसी रचना को कोई संस्था या पाठक सम्मान देता है तो लगता है कि मेरी अभिव्यक्ति किसी दूसरे मन तक पहुँची है। लेकिन मैं पुरस्कार को मंजिल नहीं मानती। मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान यह है कि कोई पाठक मेरी रचना पढ़कर कुछ महसूस करे, कुछ सोचे या अपने जीवन में कोई सकारात्मक परिवर्तन लाए।"
प्रश्न १६. ‘हिंदी की गूँज’ जैसी अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच से जापान में ‘कलम के सेनानी’ सम्मान मिलना आपके लिए किस प्रकार विशेष रहा?
जया सूद: "यह मेरे लिए बहुत सुखद और गौरवपूर्ण अनुभव था। साहित्य भाषा और भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे जाता है। जब हिंदी की रचनात्मकता को विदेश में बैठे साहित्यप्रेमियों का स्नेह और सम्मान मिलता है, तो यह बताता है कि साहित्य वास्तव में दिलों को जोड़ने की शक्ति रखता है।"
प्रश्न १७. आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से कवि सम्मेलनों में भाग लेती हैं। आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन साहित्यिक मंचों को आप किस रूप में देखती हैं?
जया सूद: "ऑनलाइन मंचों ने नए रचनाकारों को बहुत बड़ा अवसर दिया है। पहले किसी रचना को पाठकों तक पहुँचाने के लिए भौगोलिक सीमाएँ बड़ी बाधा थीं। अब एक रचनाकार देश-दुनिया के लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकता है। हाँ, इसके साथ गुणवत्ता और जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। डिजिटल मंच अवसर है, लेकिन रचनाकार को अपनी साहित्यिक गंभीरता बनाए रखनी चाहिए।"
प्रश्न १८. ‘उलझन सुलझन’ जैसे मंच पर आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। ऐसे सामाजिक-साहित्यिक मंचों से आपकी क्या अपेक्षाएँ हैं?
जया सूद: "मैं ऐसे मंचों को साहित्य और समाज के बीच सेतु मानती हूँ। साहित्य केवल पुस्तकालय की अलमारियों में सुरक्षित रहने के लिए नहीं है; उसे समाज के बीच जाना चाहिए। यदि कोई मंच साहित्य के साथ सामाजिक सरोकारों, शिक्षा और सकारात्मक चिंतन को स्थान देता है तो उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मैं चाहती हूँ कि ऐसे मंच नए रचनाकारों को भी अवसर दें।"
प्रश्न १९. आपकी लेखन यात्रा में आपके माता-पिता और पति के सहयोग का विशेष उल्लेख मिलता है। परिवार का सहयोग एक रचनाकार के लिए कितना महत्वपूर्ण है?
जया सूद: "मेरे लिए तो यह मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मेरे माता-पिता ने कभी मेरे लेखन को रोकने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमेशा मेरे सपनों को प्रोत्साहित किया। मेरे पति भी मेरे लेखन के प्रति हमेशा सकारात्मक रहे हैं। वे मेरे जीवनसाथी होने के साथ-साथ मेरे अच्छे मित्र और मार्गदर्शक भी हैं। मेरे माता-पिता और मेरे पति मेरी सफलता के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।"
प्रश्न २०. जब आप पीछे मुड़कर अपनी यात्रा देखती हैं—दसवीं की पहली कविता से लेकर पुस्तक प्रकाशन, सम्मान, कहानियों, नाटकों और रंगमंच तक—तो अपने भीतर क्या परिवर्तन महसूस करती हैं?
जया सूद: "सबसे बड़ा परिवर्तन शायद आत्मविश्वास का है। पहले मैं केवल भाव लिखती थी, अब मैं अपने भावों को बेहतर ढंग से समझने और उन्हें प्रभावी रूप देने का प्रयास करती हूँ। लेकिन संवेदनशीलता आज भी वही है। शायद यही मेरे लेखन की सबसे बड़ी पूँजी है। मैंने सीखा है कि रचनात्मक यात्रा में कभी देर नहीं होती। यदि भीतर कुछ कहने की इच्छा जीवित है तो व्यक्ति किसी भी उम्र और किसी भी परिस्थिति में फिर से शुरुआत कर सकता है।"
प्रश्न २१. एक शिक्षिका और लेखिका के रूप में आज के बच्चों और युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?
जया सूद: "बच्चों से मैं यही कहना चाहूँगी कि अपने भीतर की जिज्ञासा को कभी मरने न दें। पढ़ें, प्रश्न पूछें, अपनी कल्पना को उड़ान दें और अपनी प्रतिभा को केवल अंकों तक सीमित न करें। युवाओं से कहना चाहूँगी कि सोशल मीडिया के शोर के बीच अपने भीतर की आवाज भी सुनें। कुछ समय किताबों के साथ, प्रकृति के साथ और स्वयं के साथ बिताएँ। जीवन में सफलता जरूरी है, लेकिन एक अच्छा और संवेदनशील इंसान बनना उससे भी अधिक जरूरी है।"
प्रश्न २२. अंत में, जया जी, आने वाले समय में आपके पाठकों को आपकी ओर से क्या नया पढ़ने या देखने को मिल सकता है?
जया सूद: "लेखन मेरे लिए निरंतर चलने वाली यात्रा है। इसलिए कविता, कहानियाँ, बाल-साहित्य, नाटक और उपन्यास—जिस विधा में जो विचार और भाव आकार लेंगे, उन्हें शब्द देने का प्रयास जारी रहेगा। मेरी इच्छा है कि मेरी रचनाएँ केवल पढ़ी न जाएँ, बल्कि पाठकों के मन में कोई संवाद भी उत्पन्न करें। यदि मेरी कलम किसी एक व्यक्ति को भी कुछ अच्छा सोचने, महसूस करने या करने के लिए प्रेरित कर सके, तो मैं अपनी लेखकीय यात्रा को सार्थक मानूँगी।"
'उलझन सुलझन' की ओर से कुछ शब्द
जया सूद की रचनात्मक यात्रा यह विश्वास जगाती है कि प्रतिभा कभी समाप्त नहीं होती, वह केवल कभी-कभी विराम लेती है। दसवीं कक्षा में माँ के प्रति सहज भाव से लिखी गई पहली कविता से शुरू हुई यात्रा आज कविता-संग्रह, कहानियों, बाल-साहित्य, उपन्यास, नाटक, रंगमंच और विविध साहित्यिक मंचों तक पहुँच चुकी है।
उनकी विशेषता यह है कि वे साहित्य को जीवन से अलग करके नहीं देखतीं। शिशिक्पैदा करता है, कला उन्हें रंग देती है, रंगमंच अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास देता है और लेखन इन सभी अनुभवों को शब्दों में बदल देता है।
जया सूद की कलम की सबसे सुंदर विशेषता शायद यही है—वह केवल लिखना नहीं चाहती, वह संवाद करना चाहती है।
सूचना स्रोत
जया सूद द्वारा प्रदत्त परिचय
प्रस्तुति







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