करियर की उलझनों से स्पष्ट दिशा तक डॉ. प्रियंका शर्मा से विशेष बातचीत

करियर की उलझनों से स्पष्ट दिशा तक

डॉ. प्रियंका शर्मा से विशेष बातचीत

विशेष परिचय

डॉ. प्रियंका शर्मा एक वरिष्ठ करियर काउंसलर और स्टूडेंट एडवाइजर हैं, जिन्हें करियर काउंसलिंग के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। विज्ञान से शुरू हुई उनकी शैक्षणिक यात्रा बायोटेक्नोलॉजी, मानव संसाधन प्रबंधन और अंततः प्रशिक्षण एवं विकास में पीएच.डी. तक पहुँची। NCDA, CCC और UCLA जैसी संस्थाओं से प्राप्त पेशेवर प्रमाणन ने उनकी विशेषज्ञता को और व्यापक बनाया है।

आज वे विद्यार्थियों को केवल करियर चुनने में ही नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानने, सही कौशल विकसित करने और बदलती दुनिया में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सहायता कर रही हैं।


बातचीत

प्रश्न १. डॉ. प्रियंका जी, आपकी शैक्षणिक यात्रा विज्ञान से मानव संसाधन और फिर करियर काउंसलिंग तक पहुँची। यह यात्रा कैसे शुरू हुई?

उत्तर: "मेरी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत कक्षा बारह में विज्ञान विषय से हुई। इसके बाद मैंने बायोटेक्नोलॉजी में बी.एससी. किया।

मास्टर्स के स्तर पर मैंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ह्यूमन रिसोर्सेज (HR) को अपनी विशेषज्ञता के रूप में चुना। मुझे बहुत जल्दी यह महसूस हुआ कि मुझे लोगों के साथ काम करना, उन्हें समझना और यह जानना अच्छा लगता है कि किसी व्यक्ति को क्या प्रेरित करता है और वह किस वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

इसी रुचि ने मुझे मानव संसाधन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और मैंने ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट में विशेषज्ञता के साथ पीएच.डी. की।"

प्रश्न २. क्या आपको लगता है कि HR में आपकी विशेषज्ञता ने करियर काउंसलिंग में आपकी बहुत मदद की?

उत्तर: "बिल्कुल। मेरे लिए HR और करियर काउंसलिंग एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए क्षेत्र हैं।

HR ने मुझे व्यक्ति को केवल उसकी डिग्री या रिज्यूमे से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, व्यवहार, रुचि, प्रेरणा और संभावनाओं के संदर्भ में देखना सिखाया।

जब हम किसी विद्यार्थी को करियर चुनने में मदद करते हैं, तो केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सा कोर्स लोकप्रिय है। हमें यह समझना होता है कि विद्यार्थी कौन है, उसकी ताकत क्या है, उसे किस प्रकार का काम पसंद है और भविष्य में वह किस दिशा में विकसित हो सकता है।"

प्रश्न ३. आपने अपने करियर की शुरुआत किस रूप में की?

उत्तर: "मेरी व्यावसायिक यात्रा भी काफी विविध रही है। मैंने शुरुआत एडमिशन काउंसलर के रूप में की और साथ-साथ एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट का प्रबंधन भी किया।

इसके बाद मैं शिक्षण के क्षेत्र में आई। पीएच.डी. पूरी करने के बाद मैंने ह्यूमन रिसोर्सेज में काम किया। इस तरह मुझे शिक्षा, प्रवेश प्रक्रिया, अध्यापन, मानव संसाधन और प्रशिक्षण—इन सभी क्षेत्रों को करीब से समझने का अवसर मिला।

आज पीछे मुड़कर देखती हूँ तो लगता है कि मेरे करियर का हर पड़ाव मुझे उस भूमिका के लिए तैयार कर रहा था, जिसे मैं आज निभा रही हूँ।"

प्रश्न ४. करियर काउंसलिंग को आपने अपना मुख्य क्षेत्र कब और क्यों बनाया?

उत्तर: "पिछले लगभग छह वर्षों से मैंने स्वयं को पूरी तरह करियर काउंसलिंग के लिए समर्पित किया है। धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि यही वह क्षेत्र है जहाँ मेरी शिक्षा, अनुभव और लोगों के साथ काम करने की रुचि सबसे अच्छे तरीके से एक साथ आती है।

किसी विद्यार्थी की उलझन को समझना, उसे अपनी क्षमता पहचानने में मदद करना और फिर उसके सामने संभावित रास्तों को स्पष्ट करना—यह मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक सार्थक जिम्मेदारी और मेरा सच्चा उद्देश्य बन गया है।"

प्रश्न ५. आपने iDreamCareer के साथ भी बड़े स्तर पर काम किया है। आपका अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: "iDreamCareer के साथ काम करते हुए मुझे विभिन्न प्रकार के विद्यार्थियों और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है।

मैंने Ernst & Young, Kotak Mahindra और DLF जैसी संस्थाओं से जुड़े करियर काउंसलिंग प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया है। इसके अतिरिक्त अनेक निजी और सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ भी काम किया है।

इन अनुभवों ने मुझे यह समझने में मदद की कि प्रत्येक विद्यार्थी की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इसलिए करियर काउंसलिंग में कोई एक फार्मूला सभी पर लागू नहीं किया जा सकता।

प्रश्न ६. वर्तमान में आप किन विद्यार्थियों के साथ काम कर रही हैं?

उत्तर: "वर्तमान में मैं iDreamCareer के साथ कार्य कर रही हूँ और MGFF (Multiple Good Faith Foundation) से जुड़े एक IDC प्रोजेक्ट के अंतर्गत भी कार्य कर रही हूँ।

यहाँ मुझे विभिन्न क्षेत्रों के ग्रेजुएट स्कॉलर्स को काउंसल करने का अवसर मिलता है। मेरा काम केवल उन्हें आगे की नौकरी या अवसर बताना नहीं है, बल्कि यह समझाना भी है कि उनके पाठ्यक्रम के बाद मजबूत अवसर प्राप्त करने के लिए उन्हें किन स्किल सेट्स को विकसित करना चाहिए।

साथ ही, नए कॉलेज वातावरण में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को वहाँ स्वयं को स्थापित करने और नए परिवेश के साथ सामंजस्य बनाने में भी सहायता करती हूँ।"

प्रश्न ७. आपने अपना स्वयं का करियर काउंसलिंग प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है?

उत्तर: "जी हाँ। मैं CareerSaarthi के माध्यम से भी विद्यार्थियों का व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन करती हूँ।

विशेष रूप से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ काम करना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही वह समय है जब विद्यार्थी स्ट्रीम, विषय, उच्च शिक्षा और भविष्य के करियर को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।

कई बार विद्यार्थी स्वयं से अधिक अपने आसपास के लोगों की अपेक्षाओं से प्रभावित होते हैं। मेरा प्रयास होता है कि वे पहले स्वयं को समझें और उसके बाद अपने लिए सही निर्णय लें।"

प्रश्न ८. आपके अनुभव में विद्यार्थियों की सबसे बड़ी करियर उलझन क्या होती है?

उत्तर: "सबसे बड़ी उलझन अक्सर यह होती है कि विद्यार्थी स्वयं को पर्याप्त रूप से नहीं समझते।

कभी माता-पिता की अपेक्षा होती है, कभी मित्रों का प्रभाव होता है, कभी सोशल मीडिया से मिली जानकारी होती है और कभी किसी एक सफल व्यक्ति की कहानी देखकर विद्यार्थी वही रास्ता चुनना चाहता है।

लेकिन किसी और की सफलता का रास्ता जरूरी नहीं कि हमारे लिए भी सही हो।

इसलिए करियर का पहला प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि “सबसे अच्छा करियर कौन-सा है?” बल्कि यह होना चाहिए कि “मेरे लिए सही करियर कौन-सा है?”

प्रश्न ९. माता-पिता को करियर चुनते समय अपने बच्चों के साथ किस तरह की भूमिका निभानी चाहिए?

उत्तर: "माता-पिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें बच्चे के निर्णय का मालिक बनने के बजाय उसका सहयात्री बनना चाहिए।

बच्चे की रुचि, क्षमता और व्यक्तित्व को समझना जरूरी है। केवल इसलिए किसी क्षेत्र में जाने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह क्षेत्र समाज में प्रतिष्ठित या लोकप्रिय माना जाता है।

माता-पिता बच्चे को विकल्पों की जानकारी दें, उससे संवाद करें और सही प्रश्न पूछें। अंतिम निर्णय बच्चे की क्षमता और रुचि को ध्यान में रखते हुए मिलकर लिया जाना अधिक स्वस्थ दृष्टिकोण है।

प्रश्न १०. क्या केवल अच्छी डिग्री करियर में सफलता की गारंटी देती है?

उत्तर: "आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। डिग्री आवश्यक हो सकती है, लेकिन उसके साथ व्यावहारिक कौशल, संचार क्षमता, समस्या समाधान, डिजिटल दक्षता, टीमवर्क, अनुकूलन क्षमता और सीखते रहने की आदत भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

आज नियोक्ता केवल यह नहीं देखते कि आपने क्या पढ़ा है, बल्कि यह भी देखते हैं कि आप उस ज्ञान का उपयोग किस तरह कर सकते हैं।

इसीलिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ employability skills पर भी ध्यान देना चाहिए।"

प्रश्न ११. ग्रेजुएशन के बाद विद्यार्थियों के लिए आपकी सबसे महत्वपूर्ण सलाह क्या होगी?

उत्तर: "ग्रेजुएशन को अंतिम पड़ाव न समझें। यह अक्सर पेशेवर यात्रा की शुरुआत होती है।

विद्यार्थियों को यह पहचानना चाहिए कि उनके चुने हुए क्षेत्र में कौन-से कौशल महत्वपूर्ण हैं और वे उन्हें कहाँ से विकसित कर सकते हैं। इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स, प्रमाणपत्र, स्वयंसेवी अनुभव और वास्तविक कार्य-अनुभव उनके प्रोफाइल को मजबूत बना सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात है—अपने क्षेत्र को समझिए और स्वयं को उसके अनुरूप लगातार विकसित करते रहिए।"

प्रश्न १२. करियर काउंसलर के रूप में आपके लिए सबसे संतोषजनक क्षण कौन-सा होता है?

उत्तर: "मेरे लिए सबसे संतोषजनक क्षण वह होता है जब किसी विद्यार्थी की आँखों में अपनी दिशा को लेकर स्पष्टता दिखाई देती है।

काउंसलिंग के बाद यदि विद्यार्थी यह कहता है कि “अब मुझे समझ आ रहा है कि मुझे क्या करना है और क्यों करना है”, तो मुझे लगता है कि मेरा काम सार्थक हुआ।

हम हमेशा विद्यार्थी के लिए निर्णय नहीं लेते। कई बार हमारा सबसे महत्वपूर्ण काम केवल उसकी उलझन को स्पष्टता में बदलना होता है।

प्रश्न १३. दो दशकों के अनुभव के बाद आज करियर को लेकर आपकी सबसे बड़ी सीख क्या है?

उत्तर: "मेरी सबसे बड़ी सीख है कि **हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है।

करियर कोई एक सीधी सड़क नहीं है। परिस्थितियाँ बदलती हैं, रुचियाँ बदलती हैं, नई तकनीकें आती हैं और नए अवसर पैदा होते हैं। इसलिए करियर में लचीलापन और लगातार सीखने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण है।

किसी विद्यार्थी को केवल आज की नौकरी के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। हमें उसे ऐसी मानसिकता देनी चाहिए कि वह भविष्य में आने वाले बदलावों के साथ स्वयं को ढाल सके।"

प्रश्न १४. अंत में, आज के विद्यार्थियों के लिए आपका संदेश क्या है?

उत्तर: मैं विद्यार्थियों से यही कहना चाहूँगी कि अपने करियर का निर्णय केवल दूसरों को देखकर न लें।

अपने आप को जानिए।

अपनी ताकत पहचानिए।

अपनी कमियों पर काम कीजिए।

सही जानकारी जुटाइए।

विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लीजिए।

और सबसे महत्वपूर्ण—अपने निर्णय की जिम्मेदारी स्वयं लेना सीखिए।

करियर केवल यह तय करना नहीं है कि हमें भविष्य में कौन-सी नौकरी करनी है। करियर अपने जीवन की दिशा तय करने की प्रक्रिया है।

और यदि कभी रास्ते को लेकर उलझन हो, तो घबराइए नहीं। सही प्रश्न पूछने और सही मार्गदर्शन लेने से उलझन को सुलझन में बदला जा सकता है।"

संपादकीय टिप्पणी

डॉ. प्रियंका शर्मा की यात्रा यह बताती है कि करियर हमेशा किसी एक योजना के अनुसार नहीं बनता। विज्ञान से बायोटेक्नोलॉजी, वहाँ से मानव संसाधन, प्रशिक्षण एवं विकास, शिक्षण और अंततः करियर काउंसलिंग तक की उनकी यात्रा स्वयं इस बात का उदाहरण है कि विविध अनुभव भी भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनकी कहानी विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—करियर चुनने से पहले स्वयं को समझना जरूरी है और करियर चुन लेने के बाद स्वयं को विकसित करते रहना उससे भी अधिक जरूरी।

सूचना स्रोत

डॉ. प्रियंका शर्मा जी

हैदराबाद

माध्यम


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिक्षा का उजास (संशोधित) - श्री कुलदीप महुआ

🌼 ज्योति वही, जो मार्ग दिखाए 🌼

संघर्ष, संस्कृत और सफलता का संगम